महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत 129
प्रांत के गठन के बाद वह आकार में त्रिकोण जैसा लगेगा। इस त्रिकोण की एक रूप रेखा भारत का पश्चिमी तट है, जो उत्तर में दमन से लेकर दक्षिण में कारवाड़ तक फैला हुआ है। बंबई शहर दमन और कारवाड़ की तटरेखा के बीच में स्थित है। गुराजत प्रांत दमन से शुरू होकर उसके उत्तर में फैला हुआ है, जबकि कन्नड़ प्रांत कारवाड़ से शुरू होता है और उससे दक्षिण की ओर फैलता जाता है। बंबई गुजरात के प्रारंभ बिंदु दमन से करीब 85 मील दक्षिण में है, तो कर्नाटक प्रांत के प्रारंभ बिंदु कारवाड़ से करीब 250 मील उत्तर में स्थित है। यदि दमन से कारवाड़ तक का अविच्छिन भू - भाग भौगोलिक दृष्टि से महाराष्ट्र का हिस्सा है, तो फिर बंबई का महाराष्ट्र का हिस्सा न मानना कहां तक उचित होगा? यह तो निर्विवाद रूप से प्राकृतिक तथ्य है, भूगोल ने ही बंबई को महाराष्ट्र का अंग बनाया है। जो लोग इस प्राकृतिक तथ्य को नकार कर उसे चुनौती देना चाहते हैं, वे चुनौती देते रहें। पूर्वाग्रहों से मुक्त बुद्धि वाले व्यक्ति तो इस निर्णायक साक्ष्य को स्वीकार करेंगे और यह मान लेंगे कि बंबई महाराष्ट्र का हिस्सा है।
बंबई और मराठा साम्राज्य
यदि मराठों ने बंबई के भू - भाग को अपने साम्राज्य का हिस्सा बनाने की ओर ध्यान नहीं दिया तो इससे भौगोलिक साक्ष्यों द्वारा प्रमाणित निष्कर्षों की वैधता पर कोई आंच नहीं आती। यदि मराठों ने इसे जीतने की परवाह नहीं की तो इससे यह तो सिद्ध नहीं होता कि बंबई महाराष्ट्र का हिस्सा नहीं है। इससे तो केवल यही साबित होता है कि चूंकि मराठा शक्ति एक भू - शक्ति मात्र थी, इसलिए उसने एक बंदरगाह को जीतने में अपनी शक्ति का कभी दुरुपयोग नहीं किया।
बिंदु संख्या (1) और (2) के बारे में फैसला हो जाने के बाद अब साबित करने का भार उन लोगों पर आ गया है, जो इस बात के लिए संघर्षरत् हैं कि बंबई को महाराष्ट्र में नहीं मिलाया जाना चाहिए। क्या उन्होंने अपना यह कर्तव्य पूरा किया है? इसके बाद अब दूसरे बिंदुओं पर विचार की बारी आती है।
| fc | an |
|---|
बिंदु संख्या (3)
मराठी भाषी जनता - बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक
- इस मुद्दे पर मतैक्य नहीं दिखाई पड़ता। बंबई को महाराष्ट्र में मिलाने से संबंधित विषय पर बोलते हुए प्रो. गाडगिल इस तथ्य पर बल देते हैं कि बंबई की मराठी - भाषी जनसंख्या 1941 की जनगणना के अनुसार 51 प्रतिशत है। इस प्रस्ताव के विरोध में बोलते हुए प्रो. घीवाला बताते हैं कि यह केवल 41 प्रतिशत ही है। प्रो. वकील तो इसे और नीचे 39 प्रतिशत पर ले आते हैं। इस संख्या को भी वे बहुत ही उदारता पूर्ण प्राक्कलन मानते हैं। इन आंकड़ों की जांच कर लेने का मुझे अवसर नहीं मिला। मैं तो यह मानता हूं कि बंबई की जनगणना के आंकड़े ठीक - ठीक प्रतिशत तक पहुंचने में अधिक मदद नहीं करते