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महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत 131

ने, अर्थात् सूरत के बनियों बिरादरी वालों ने बंबई आने के खतरों को ध्यान में रखते

हुए कुछ विशेषाधिकार पाने का आश्वासन मांगा हो। कंपनी सरकार ने महाजनों के

इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी हो। 10 जनवरी को सूरत काउंसिल ने कपंनी

को लिखा, ‘‘महाजन या बनियों की मुख्य काउंसिल आपके उस कृपापूर्वक उत्तर

से बहुत संतुष्ट लगी, जिसे आपने सेम्सन जहाज से भेजी गई उनकी याचिका के

उत्तर में भेजा था। इस याचिका में बंबई आने से संबंधित विशेषाधिकारों की मांगों का

उल्लेख था। ऐसा लगता है कि वे फिर एक बार आपको तकलीफ देना चाहते हैं,

क्योंकि उन्होंने आपके आढ़तिए भीमजी पारेख से आपको पत्र लिखवाया है, जिसमें

उन्होंने अपनी यह इच्छा व्यक्त की है कि आपके हस्ताक्षरों और मोहर लगाकर उन्हें

ये विशेषाधिकार प्रदान किए जाएं। इन विशेषाधिकारों को पाने के लिए उन्होंने अपने

पत्र में कारण भी दिए हैं। उनका यह पत्र आपकी अन्य डाक के साथ फाल्कन नामक

जहाज से भेजा जा रहा है। उनके इस प्रकार के अनुरोध की पुष्टि के लिए उन्होंने

जो तर्क प्रस्तुत किए हैं, उनमें थोड़ा वजन है। उनका कहना है कि मान्य कंपनी तो

कालातीत है और उसके अध्यादेशों में बल भी होता है, किन्तु कंपनी के प्रधान और

परिषद के सदस्य तो बदलते रहते हैं और ऐसा देखा गया है कि उत्तरवर्ती प्रधान

और सदस्य अपने पूर्ववर्तियों द्वारा प्रदत्त सुविधाओं को बदल देते हैं, इसलिए उन्होंने

आपकी सेवा में यह याचिका दी है और चाहते हैं कि आप उसे स्वीकृति प्रदान करने

की कृपा करें। इस याचिका पर हमारी सादर सम्मति यह है कि इसमें ऐसा कुछ भी

नहीं है, जिससे आपको किसी तरह का नुकसान पहुंचने की गुंजाइश हो, उल्टे इसे

मान लेने पर पर्याप्त लाभ होने की संभावना नजर आती है। इसलिए गुजारिश है कि

आप जैसा उचित समझें, उन्हें सुविधाएं देने की अनुकम्पा करें। आशा है, आप इस

याचिका का समुचित उत्तर शीघ्र देने की कृपा करेंगे। इससे उनको शांति मिलेगी

और आपके हितों को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

  1. वे विशेषाधिकार क्या थे, जो उन गुजराती बनियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी से मांगे थे? दीव शहर के नीमा पारेख नाम के किसी प्रसिद्ध बनिए की निम्नलिखित याचिका से उनका कुछ स्वरूप स्पष्ट हो जाएगा। *

क. माननीय कंपनी से अनुरोध है कि वह उसे घर बनाने या भंडार घर खोलने के

लिए इस कस्बे में या इसके आसपास बिना किराए के अपने विवेक के अनुसार

जमीन आवंटित करने की कृपा करें।

ख. उसे और ब्राह्मणों (गौड़ों या पुरोहितों) को उनकी जाति के अन्य लोगों के साथ

यह सुविधा प्रदान की जाती है कि वे अपने - अपने घरों में अपने धर्म के अनुसार

बिना किसी बाधा के आचरण कर सकेंगे। अन्य किसी भी व्यक्ति को उनसे

छेड़छाड़ करने की छूट नहीं दी जाएगी। किसी भी अंग्रेज, पुर्तगाली या किसी

भी ईसाई अथवा मुसलमान को उनके परिसर में बसने की अथवा वहां किसी

* बोंबे गजेटियर, खंड I पृष्ठ 74 - 76