3. महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत - Page 149

132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

जीवित प्राणी का वध करने की या उन्हें किसी प्रकार की चोट पहुंचाने की या

उनका अपमान करने की अनुमति नहीं होगी और यदि कोई उनके परिसर में

ऐसा करते पाया गया और सूरत के गवर्नर को या बंबई के डिप्टी गवर्नर को

तत्संबंधी शिकायत मिली तो अभियुक्तों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।

उन्हें अपने रीति - रिवाजों के अनुसार मृतक का शव - दाह करने की छूट होगी,

शादी - ब्याह के मौके पर सभी रस्में पूरी करने दी जाएंगी तथा किसी भी उम्र

के व्यक्ति को या स्त्री - पुरुष में से किसी को किसी भी शर्त पर जबरन ईसाई

धर्म अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा और न ही उनकी मर्जी के

खिलाफ बोझा ढोने को बाध्य किया जाएगा।

ग. उसे और उसके परिवार को निगरानी और रखवाली से संबंधित सभी प्रकार के

कर्तव्यों से मुक्त रखा जाएगा, न तो कंपनी और न ही गवर्नर, डिप्टी गवर्नर या

परिषद या और कोई व्यक्ति किसी भी बहाने उसे निजी या सार्वजनिक कार्यों

के लिए रुपया उधार देने को बाध्य नहीं कर सकेगा।

घ. यदि उसके या उसके वकील या मुख्तार या उसकी जाति के बनियों और उस

द्वीप में रहने वाले किसी अन्य व्यक्ति के बीच किसी प्रकार का मतभेद या कानूनी

तौर पर कोई मुकदमा उठ खड़ा हो, तो गवर्नर या डिप्टी गवर्नर उसे या उनको

सार्वजनिक तौर पर गिरफ्तार करने, अपमानित करने या जेल भिजवा कर ठेस

नहीं पहुंचाएगा। ऐसा करने से पहले उसे कारण बताते हुए उचित नोटिस देना

होगा और उसके या उनके साथ ईमानदारी और सदाशयतापूर्वक न्याय करने

का आश्वासन देना होगा। यदि उसके या उसके मुख्तार और उसकी जाति के

किसी भी बनिए के बीच कोई विवाद उठ खड़ा होता है तो उन्हें इस बात की

स्वतंत्रता होगी कि कानून की शरण में गए बिना ही वे परस्पर मिलकर उस

मामले को निपटा लें।

ड. उसे अपने जहाजों या जलयानों में व्यापार करने की स्वतंत्रता होगी, वह अपनी

पसंद के किसी भी पत्तन पर जब चाहे आ - जा सकेगा। इसके लिए यदि वह

गवर्नर या डिप्टी गवर्नर या सौदागर को पूर्व - नोटिस दे देता है और उसके लिए

उनकी सहमति मिल जाती है, तब उसे लंगर - भाड़ा नहीं चुकाना पड़ेगा। च. यदि वह ऐसा कोई माल अधिक मात्रा में तट पर लाता है, जिसे वह एक साल

की अवधि में उस द्वीप पर न बेच सके, तो उसे सामान को बिना कस्टम चुकाए

ही उसके मनपसंद पत्तन तक ले जाने की छूट होगी।

छ. यदि कोई व्यक्ति उससे ऋण ले और अन्य बनियों से भी ले - ले और किसी

कारण से सारा उधार चुकाने की स्थिति में न हो, तो अन्य बनियों की तुलना

में ऋण उगाहने के उसके अधिकार को तरजीह दी जाएगी।