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महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत 135

है। मैं नहीं समझता कि वह धन, जवाहरात, महंगे कपड़े, घर में काम आने वाला सामान और मूल्यवान कपड़े जो कि कम जगह में रखे जा सकते हैं, के बजाए घटिया सामान से अपने किले को भर देगा। वह किले में अपनी पसंद की चीजें ला सकेगा और उसे व उसके परिवार के लिए अलग से एक गोदाम की भी व्यवस्था होगी।’’

‘‘नवीं और दसवीं मांग को हम एक साथ ले सकते हैं। केवल संख्या बढ़ाने के लिए ही याचिका में उन्हें अलग - अलग रखा गया है। ऐसा केवल यह दिखाने भर के लिए किया गया है कि वे कैसा जीवन जी रहे हैं, जब उन्हें यह भान होगा कि ऐसा उन्होंने हमारी सरकार की परीक्षा लेने भर के लिए किया है तो वे यह सोचकर हम पर हंसेंगे कि उन्होंने जितनी मांग की है, उससे कहीं अधिक स्वतंत्रता का तो वे पहले से ही उपभोग कर रहे हैं। क्योंकि उचित नोटिस देने पर तो प्रवेश या विकास की सुविधा छोटे से छोटे व्यक्ति को भी उपलब्ध है। जहां तक घोड़े रखने या बग्घी में सवार होने या ऐसा कोई अन्य सवाल है, उसे मन पसंद संख्या में उन्हें पालने या रखने की छूट दी जा सकती है और उसके सेवकों को भी मनपसंद हथियार धारण करने की अनुमति दी जा सकती है। यह छूट तो सभी को दी जा सकती है। कुछ भी खरीदने या बेचने की पूरी स्वतंत्रता तो हमने दे ही रखी है, क्योंकि हम जानते हैं कि यही तो व्यापार की कुंजी है।’’

‘‘अंत में उसने मांग की है कि उसे बिना किसी शुल्क के दस मन तम्बाकू रखने का अधिकार दिया जाए। यह सबसे भारी मांग है, जिससे सहमत होना सबसे कठिन काम लगता है। इसका कारण यह है कि इसे मान लेने पर अन्य अनेक किसान भी इस प्रकार की छूट प्राप्त करने की मांग करेंगे, क्योंकि दस मन तम्बाकू बेचने से उन्हें भारी नफा होने की संभावना है। इसलिए इस प्रार्थना को कैसे स्वीकार किया जाए, इसके बारे में हमारा ज्ञान सीमित है। मान्यवर आप ही इस बारे में हमसे अधिक अच्छा निर्णय ले सकते हैं।‘‘ ख्12,

  1. उत्तर में सूरत परिषद ने 26 जून को लिखा : ख्13, ‘‘नीमा पारेख बनिए ने बंबई द्वीप में बसने के लिए अपनी याचिका में जो मांगे रखी हैं, उनके बारे में आपका उत्तर देखा। जब हम फिर से उसके संदर्भ में विचार करते हैं तो हमें लगता है कि मामले को इस तरह सुलझाने के लिए कि द्वीप में बिना किसी पूर्वाग्रह के वह आकर बसे हमें चाहिए कि हम उसकी इस मांग को मान लें कि उसे बिना शुल्क के प्रति वर्ष दस मन तम्बाकू द्वीप में लाने दिया जाएगा।‘‘ बिंदु संख्या (5)

बंबई पूरे भारत का व्यापार केंद्र

  1. इस तथ्य को स्वीकार किया जाना चाहिए कि बंबई सारे भारत का व्यापार केंद्र है। किन्तु इस तर्क को कैसे स्वीकार किया जाए कि केवल इसी बात के आधार

12 नीमा पारेख ने यह नई मांग रखी है।

13 बोंबे गजेटियर, खंड 1, पृष्ठ 77