3. महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत - Page 153

136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

पर यह कहा जाने लगे कि महाराष्ट्र बंबई पर अपना दावा नहीं कर सकता। हर पत्तन, जिस देश या प्रदेश में वह स्थित है, उसके आसपास के ही नहीं दूर - दूर के इलाकों को भी सेवा करता है। इस आधार पर कोई यह नहीं कह सकता है कि जिस देश में वह पत्तन स्थित है, वह देश उस पत्तन को अपना इलाका नहीं मान सकता। स्विट्जरलैंड में कोई पत्तन नहीं है। वह या जो जर्मनी, इटली के या फ्रांस के पत्तनों का उयोग करता है, क्या इसीलिए स्विट्जरलैंड उन पत्तनों पर जर्मनी, इटली या फ्रांस के भौगोलिक अथवा प्रादेशिक अधिकार को मानने से इंकार कर सकता है? तो फिर बंबई पर महाराष्ट्र का दावा केवल इसीलिए क्यों स्वीकार नहीं किया जाए कि महाराष्ट्र के अतिरिक्त अन्य प्रांत भी उसका उपयोग करते हैं? हां, वह स्थिति दूसरी होगी, जब महाराष्ट्र को यह अधि् ाकार मिल जाए कि वह इस पत्तन को गैर - महाराष्ट्रियों के लिए बंद कर दे। संविधान के अनुसार, उसे इस बात का अधिकार नहीं होगा। परिणामतः बंबई के महाराष्ट्र में मिल जाने पर भी गैर - महाराष्ट्रवासियों के लिए इस पत्तन को पहले की ही तरह उपयोग करते रहने के अधिकार में किसी तरह का अंतर नहीं आएगा। बिंदु संख्या (6)

गुजराती - बंबई के व्यापार और उद्योग के मालिक

  1. यह तथ्य स्वीकार्य है कि गुजरातियों का व्यापार पर एकाधिकार है। पर, जैसा कि पहले बताया जा चुका है, यह भी सही है कि उनका यह एकाधिकार केवल इसलिए संभव हुआ है, क्योंकि ईस्ट इंडिया कंपनी ने उन्हें बंबई में बसाने के लिए कुछ विशेषाधिकार दिए थे और उन विशेषाधिकारों के फलस्वरूप ही उन्होंने बहुत लाभ कमाया। बंबई में व्यापार और उद्योग किसने खड़े किए और करवाए, यह विषय ऐसा है, जिसके लिए अधिक अनुसंधान की आवश्यकता नहीं है। गुजरातियों ने ही बंबई में व्यापार शुरू किया और उद्योग लगाए। इस कथन का वस्तुतः कोई आधार नहीं है। व्यापार और उद्योग धंधा तो यूरोपवासियों ने शुरू किया, न कि गुजरातियों ने। फिर भी जो लोग बार - बार यही रट लगाते रहते हैं, उन्हें अपना दावा दोहराने से पहले एक बार ‘द टाइम्स आफ इंडिया डाइरेक्टरी‘ देख लेनी चाहिए। गुजरातियों ने तो केवल सौदागारों का काम किया है। सौदागर होने में और उद्योगपति होने में बड़ा फर्क है।

  2. जब एक बार यह तय हो गया कि बंबई महाराष्ट्र का ही हिस्सा है तो फिर बंबई को महाराष्ट्र प्रांत में मिलाने के दावे को इस दलील से खारिज नहीं किया जा सकता कि बंबई के व्यापार और उद्योगों के मालिक गुजराती हैं। मान लो, कोई व्यक्ति अपनी जमीन किसी के पास गिरवी रखे ओर वह ऋणदाता उस जमीन पर किसी प्रकार का टिकाऊ ढांचा खड़ा कर ले तो केवल इस आधार पर उस ऋणी व्यक्ति का उस जमीन पर दावा हट नहीं जाता। मान लो, गुजरातियों ने ही बंबई में व्यापार और उद्योग