निरीक्षण तथा संतुलन के उपायों की आवश्यकता
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मेरी राय में किसी भी भाषावार राज्य के अस्तित्व में आने से पहले तीन शर्तें पूरी होनी चाहिएं। पहली शर्त यह है कि वह राज्य आर्थिक दृष्टि से आत्म - निर्भर हो। संविधान बनाते समय देसी रियासतों के विलय के प्रश्न पर जब विचार किया गया तो इस नियम को नितांत अनिवार्य माना गया था। केवल उन्हीं देसी रियायतों को स्वतंत्र राज्यों का दर्जा दिया गया, जो आर्थिक दृष्टि से आत्म - निर्भर थी। शेष सभी को पड़ोसी राज्यों में मिला दिया गया।
सहारा जैसी स्थिति
क्या प्रस्तावित आंध्र राज्य आर्थिक दृष्टि से आत्म - निर्भर है? न्यायमूर्ति श्री वांचु ने स्पष्ट रूप से यह माना था कि आंध्र राज्य का वार्षिक राजस्व - घाटा पांच करोड़ रुपए होगा। क्या इस घाटे को कम करने के लिए आंध्र राज्य या तो नए कर लगाएगा या अपना खर्च कम करेगा? आंध्रवासियों पर ही इसका असर होगा। क्या इस घाटे की पूर्ति की जिम्मेदारी केंद्र अपने ऊपर लेगा? यदि हां, तो क्या यह जिम्मेदारी केवल प्रस्तावित आंध्र राज्य तक ही सीमित रहेगी या केंद्र ऐसे ही अन्य मामलों में भी जिम्मेदारी उठाएगा? इन प्रश्नों का जवाब मिलना चाहिए?
नए आंध्र राज्य की राजधानी नियत नहीं की गई है। प्रसंगवश मैं कहना चाहूंगा कि मैंने यह कभी नहीं सुना कि कोई नया राज्य बना हो और यह तय नहीं हुआ हो कि उसकी राजधानी क्या होगी? श्री राजगोपालाचारी जो पक्के तमिल हैं, आंध्र राज्य की सरकार के प्रति इतना शिष्टाचार नहीं बरतेंगे कि उसे एक रात के लिए ही सही मद्रास शहर में टिकने दें, जैसा कि हिन्दू धर्म सभी हिन्दुओं को अपने अतिथियों के प्रति अपनाने की शिक्षा देता है। नई सरकार को अपना आवास स्वयं ढूंढना होगा और सरकार चालने के लिए अपने घर बनाने होंगे। इसके लिए वह कौन सी जगह चुनेगी? खोखे खड़े करने के लिए पैसा कहां से आएगा? आंध्र तो सहारा के रेगिस्तान जैसा है, जहां कोई नखलिस्तान भी नहीं है। यदि उसकी सरकार इस सहारा में तत्कालिक शरण लेती है, तब भी आगे चलकर उसे किसी अधिक स्वास्थ्यप्रद स्थान में अपना लवाजमा ले जाना ही होगा। इस तरह इस अस्थायी मुख्यालय पर अनावश्यक खर्च करना होगा। क्या सरकार ने समस्या के इस पहलू पर भी विचार किया है? अभी से क्यों न उन्हें ऐसा स्थान आवंटित कर दिया जाए, जहां स्थायी तौर पर राजधानी रखने की संभावनाएं अधिक नजर आती हों।
मेरी दृष्टि में राजधानी के लिए वारंगल सर्वाधिक उचित स्थान है। वह आंध्र की पुरानी राजधानी रहा है। यहां रेलवे जंक्शन है। यहां पर्याप्त संख्या में भवन भी उपलब्ध हैं। यह सही है कि यह शहर आंध्र के उस इलाके में स्थित है, जो हैदराबाद रियासत का हिस्सा है। सैद्धांतिक दृष्टि से तो यह होना चाहिए था कि विशालकाय और अष्टावक्र जैसे आकार वाली हैदराबाद रियासत का विभाजन किया जाता और अलग से एक पूर्ण आंध्र राज्य