172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि अमरीका में उत्तर और दक्षिण के बीच गृह युद्ध हुआ था। भारत के उत्तर और दक्षिण में भी गृह युद्ध छिड़ सकता है। इस प्रकार के संघर्ष का मार्ग समय प्रशस्त करेगा। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उत्तर और दक्षिण में भारी सांस्कृतिक मतभेद है और सांस्कृतिक मतभेद बहुत जल्दी भड़क जाते हैं।
उत्तर के समेकन और दक्षिण के विघटन की बात सोचते हुए आयोग ने यह महसूस नहीं किया कि वे केवल भाषायी समस्या का हल तलाश नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक राजनीतिक समस्या से जूझ रहे हैं। यदि इसी समय ऐसे संकट के निवारण के लिए कदम न उठाए गए, तो यह राजनेताओं के लिए अत्यंत लज्जास्पद बात होगी। लेकिन इसका उपचार कैसे हो?
भाग III
समाधान
| v | /; | k; |
|---|
उत्तर का विभाजन
अब जब कि हम समस्या से अवगत हो चुके हैं, हमें इसका हल ढूंढ़ना चाहिए। हल, जाहिर है, यही हो सकता है कि हम राज्य के आकार का निर्धारण करने के लिए कोई मानदंड अपना लें। इस प्रकार का मानदंड निश्चित करना सरल नहीं है। यदि दो करोड़ की जनसंख्या को मानदंड मान लिया जाए तो दक्षिण के अधिकांश राज्य मिश्रित राज्य बन जाएंगे। इसलिए उत्तरी राज्यों के संकट का सामना करने के लिए दक्षिणी राज्यों का आकार बढ़ाना असंभव है। इसका एकमात्र समाधान यही है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों के टुकड़े कर दिए जाएं। मेरी समझ में नहीं आता कि यह हल कांग्रेस कार्यकारिणी समिति को क्यों नहीं सूझा। यह तो पूरा स्पष्ट है।
उत्तरी राज्यों का विभाजन
जैसा कि मैं कह चुका हूं आयोग ने भाषावार राज्यों की रूपरेखा तैयार करते समय उत्तर का समेकन और दक्षिण का विघटन कर दिया है। मुझे विश्वास है कि आयोग ने ऐसा जान बूझकर नहीं किया है। लेकिन जानबूझकर कर किया या अनजाने में, तथ्य यही है। इसके दुष्परिणाम भी स्पष्ट हैं।
इसलिए यह जरूरी है कि इस स्थिति को सुधार लिया जाए। और इसका एकमात्र तरीका यही है कि (1) उत्तर प्रदेश, (2) बिहार, और (3) मध्य प्रदेश इन तीन राज्यों को छोटी - छोटी इकाइयों में बांट दिया जाए।