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भाषावार राज्यों के संबंध में विचार

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इस संबंध में मैं कुछ सुझाव देना चाहता हूं।

इस विभाजन से भाषावार राज्य के मूल सिद्धांतों का कोई विरोध नहीं है, इसलिए कि यदि इन राज्यों का सुझाए गए ढंग से विभाजन किया जाए, तो शेष प्रत्येक राज्य भाषावार राज्य हो जाएगा।

मुझे यह जानकार प्रसन्नता हुई कि श्री पंत ने हाल ही में इसी विषय पर संसद में हुई बहस के दौरान कहा कि मुझे उत्तर प्रदेश के बंट जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन जो कुछ उत्तर प्रदेश के बारे में कहा, वही बिहार और मध्य प्रदेश पर भी लागू होता है।

उत्तर प्रदेश का विभाजन - मेरा उत्तर प्रदेश के बारे में यह प्रस्ताव है कि उसे तीन राज्यों में विभक्त कर दिया जाए (देखें मानचित्र 2)। इनमें से प्रत्येक राज्य की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ हो, जिसे किसी भी राज्य के कारगर प्रशासन के लिए जनसंख्या का मानक आकार मान लिया जाए। इन तीन राज्यों की सीमा रेखाएं कहां खींची जाएं, इसका निर्देश मैंने संलग्न मानचित्र संख्या 2 में किया है।

उत्तर प्रदेश के तीन राज्यों की राजधानियां (1) मेरठ, (2) कानपुर, और (3) इलाहाबाद हो सकती हैं। ये तीनों नगर प्रत्येक राज्य के बिल्कुल बीच में स्थित हैं।

बिहार का विभाजन - बिहार के संबंध में मेरा प्रस्ताव यह है कि इसे दो राज्यों में बांटा जाए (देखें मानचित्र 3)। इन दो राज्यों में प्रत्येक की जनसंख्या डेढ़ करोड़ से कुछ अधिक होगी। किसी भी सरकार के लिए प्रशासन के प्रयोजन के लिए यह कोई छोटी जनसंख्या नहीं है।

सीमा - रेखाओं का निर्देश मैंने संलग्न मानचित्र संख्या 3 में किया है।

बिहार के इन दो राज्यों की राजधानियां (1) पटना, और (2) रांची हो सकती हैं। ये दोनों राज्यों के ठीक बीच में स्थित है।

मध्य प्रदेश का विभाजन - मध्य प्रदेश के हमारे सामने दो रूप हैं, पुराना मध्य प्रदेश और नया मध्य प्रदेश।

पुराने मध्य प्रदेश में निम्नलिखित राज्य आते हैं :

(1) वह प्रांत जो किसी समय मध्य प्रांत और बरार कहलाता था, और

(2) पूर्वी राज्यों के नाम से विदित राज्यों में से कुछ भारतीय राज्य।

मध्य प्रदेश के इस पुराने राज्य की जनसंख्या ढाई करोड़ थी। इसमें 22 जिले थे। इसकी विधान सभा के 223 सदस्य थे।

नए मध्य प्रदेश में जिसकी आयोग ने योजना बनाई है, निम्नलिखित क्षेत्र होंगे :

(1) पुराने मध्य प्रदेश के 14 जिले,

(2) संपूर्ण भोपाल,