5. भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - Page 191

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(3) संपूर्ण विंध्य प्रदेश,

(4) मध्य भारत जिसमें सुनेल इन्कलेव और मंदसौर जिला होगा, और

(5) राजस्थान के कोटा जिले का सिरोंज उप - खंड।

इस नए मध्य प्रदेश की कुल जनसंख्या 2 करोड़ 60 लाख 10 हजार और क्षेत्रफल लगभग 171.200 वर्गमील होगा।

मेरा सुझाव है कि इसे दो राज्यों में बांटा जाए : (1) उत्तरी मध्य प्रदेश, और (2) दक्षिणी मध्य प्रदेश (देखें मानचित्र 4)।

उत्तरी मध्य प्रदेश के नए राज्य में निम्नलिखित क्षेत्र शामिल होंगे :

(1) संपूर्ण विंध्य प्रदेश और

(2) संपूर्ण भोपाल राज्य।

दक्षिणी मध्य प्रदेश के राज्य में ये होंगे :

(1) संपूर्ण इन्दौर राज्य, और

(2) महाकोशल के 14 जिले।

इस इन्दौर राज्य की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ होगी और इस विंध्य प्रदेश की जनसंख्या लगभग 1 करोड़ 30 लाख (देखें मानचित्र 4)।

आयोग ने इस भीमाकार राज्य की रचना क्यों की, यह हमारी समझ से बाहर है। प्रधानमंत्री नेहरू को भी इसकी रचना पर आश्चर्य हुआ था।

हमारी समझ में केवल इतना आता है कि आयोग की शायद यह धारणा रही हो कि एक भाषा, एक राज्य ऐसा सुस्पष्ट आदेश है, जिससे विचलन संभव नहीं। जैसा कि मैं बता चुका हूं, एक भाषा, एक राज्य कभी सुस्पष्ट आदेश हो ही नहीं सकता। वास्तव में ‘एक भाषा एक राज्य’ हमारा मापदंड होना चाहिए। और इसीलिए एक भाषा - भाषी अपने को कई राज्यों में बांट सकते हैं।

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महाराष्ट्र की समस्याएं और समाधान

महाराष्ट्र भी एक और क्षेत्र है, जो विवाद का विषय बना हुआ है। इसके हल के लिए चार प्रस्ताव मैदान में हैं :

(1) बंबई राज्य को यथावत बना रहने दिया जाए, अर्थात् इसे एक मिश्रित राज्य

रहने दिया जाए, जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात और बंबई तीनों आ जाएं।

(2) वर्तमान राज्य को भंग कर दिया जाए, महाराष्ट्र और गुजरात को अलग - अलग

कर दिया जाए और उनके दो पृथक - पृथक राज्य बना दिए जाएं।