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भाषावार राज्यों के संबंध में विचार

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(3) संयुक्त महाराष्ट्र बना दिए जाए, जिसका बंबई भी एक राज्य हो।

(4) बंबई को महाराष्ट्र से अलग करके उसे एक पृथक नगर राज्य बना दिया

जाए।

मैं यहां अपने प्रस्ताव भी प्रस्तुत करता हूं, जो इस प्रकार हैं :

बंबई को मिश्रित राज्य न रहने दिया जाए।

मैं महाराष्ट्र को चार राज्यों में विभक्त करने के पक्ष में हूं (देखें मानचित्र 5) : (1) महाराष्ट्र नगर राज्य (बंबई), (2) पश्चिमी महाराष्ट्र, (3) मध्य महाराष्ट्र, और (4) पूर्वी महाराष्ट्र।

महाराष्ट्र नगर राज्य - बंबई नगर जिसमें महाराष्ट्र का वह क्षेत्र सम्मिलित हो, जो उसे एक अच्छा और सशक्त नगर राज्य बना सके।

पश्चिमी महाराष्ट्र - (1) थाना, (2) कोलाबा, (3) रत्नगिरी, (4) पूना, (5) उत्तर सतारा, (6) दक्षिण सतारा, (7) कोल्हापुर, और (8) मराठी भाषी क्षेत्र जो कर्नाटक को दे दिए गए हैं।

मध्य महाराष्ट्र - (1) डोंगा, (2) पूर्व खानदेश, (3) पश्चिम खानदेश, (4) नासिक, (5) अहमनगर, (6) औरंगाबाद, (7) नांदेड़, (8) परभणी, (9) बीड़, (10) उस्मानाबाद, (11) शोलापुर सिटी और शोलापुर जिले का मराठी - भाषी क्षेत्र, और (12) वे मराठी भाषी क्षेत्र, जो तेलंगाना को सौंप दिए गए हैं।

पूर्वी महाराष्ट्र - (1) बुलढाना, (2) यवतमाल, (3) अकोला, (4) अमरावती, (5) वर्धा, (6) चांदा, (7) नागपुर, (8) भंडारा, (9) वे मराठी भाषी क्षेत्र, जो हिन्दी राज्यों को दे दिए गए हैं।

अब मैं इन प्रस्तावों के गुण - दोषों की जांच करूंगा।

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महाराष्ट्रीय मिश्रित राज्य के अधीन रहें

क्या बंबई को मिश्रित राज्य बना रहने दिया जाए। यह बहुत ही असामान्य प्रक्रिया है। कलकत्ता नगर पृथक नगर राज्य नहीं है। मद्रास पृथक नगर राज्य नहीं है। फिर बंबई को ही क्यों अपवाद बनाया जाए?

दूसरा कारण यह है कि यह पहले ही से मिश्रित राज्य है। इस मिश्रित राज्य के अधीन रहने पर महाराष्ट्रियों का क्या अनुभव है? महाराष्ट्रियों को इस मिश्रित राज्य में रहने से बहुत नुकसान हुआ। बंबई मंत्रिमंडल में महाराष्ट्रियों की क्या स्थिति है? आइए मंत्री मदों के बंटवारे पर विचार करें :

गुजराती मंत्री - 4

मराठी मंत्री - 4

कन्नड़ मंत्री - 1

योग - 9