5. भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - Page 194

भाषावार राज्यों के संबंध में विचार

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जनसंख्या­ 1950 - 51­ 1951 - 52­ 1952 - 53­ जनसंख्या­

1950 - 51­

1951 - 52­

1952 - 53­

  1. महाराष्ट्र­ 2,17,20,091­ 1.7­ 2.3­ 1.8­
  2. गुजरात­ 1,18,96,789­ 2.9­ 3.1­ 3.2­

कैसा भेदभावपूर्ण व्यवहार है? कैसा पक्षपात है? कैसा अन्याय है? क्या कोई महाराष्ट्रियों को दोषी ठहरा सकता है, यदि वे बंबई के मिश्रित राज्य के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करें?

इस प्रकार कोई भी महाराष्ट्रीय व्यक्ति अपनी अधीनता की ऐसी स्थिति सहन नहीं कर सकता। इसलिए मिश्रित राज्य का हमेशा के लिए परित्याग कर देना चाहिए।

बंबई नगर की स्थिति

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बंबई नगर का क्षेत्र एक विवादास्पद विषय है और यह विवाद बहुत तीव्र बन चुका है। महाराष्ट्रीय चाहते हैं कि यह नगर महाराष्ट्र का भाग बने। गुजराती चाहते हैं कि यह नगर एक पृथक राज्य हो। इसी विवाद पर सिर - फुटव्वल हुई है, लेकिन इस पर कोई सहमति नहीं हो पाई। इसलिए यह जरूरी है कि मामले की जड़ तक पहुंचा जाए।

गुजराती बंबई को अपना शहर नहीं मानते, लेकिन यह भी नहीं चाहते कि वह उनके हाथों से निकल जाए। चूंकि इस नगर के व्यापार और उद्योग पर उनका नियंत्रण है, इसलिए वे इस पर एक प्रकार का सुविधाधिकार चाहते हैं। मुद्दा है कि यह महाराष्ट्र का अंग बने या इसका पृथक राज्य के रूप में निर्माण किया जाए? इस मुद्दे पर गुजरातियों और महाराष्ट्रियों में तीव्र मतभेद हैं। महाराष्ट्रीय चाहते हैं कि बंबई नए महाराष्ट्र राज्य का ही अंग बने। गुजराती इसका डटकर विरोध करते हैं। उन्होंने दो विकल्प रखे हैं। एक विकल्प तो यह है कि वर्तमान द्विभाषी बंबई राज्य को तोड़कर गुजरात और महाराष्ट्र की दो भाषायी इकाइयां न बनाई जाएं। कांग्रेस कार्यकारिणी समिति का निर्णय यह है कि बंबई नगर को एक पृथक राज्य बना दिया जाए।

गुजराती खुश हैं, लेकिन जाहिर है महाराष्ट्रीय इससे नाराज हैं। महाराष्ट्रियों का रोष बिल्कुल जायज है। महाराष्ट्रियों के विरुद्ध जो तर्क प्रस्तुत किए गए हैं, उनमें कोई दम नहीं है।

पहला तर्क जो दिया गया गया है, वह यह है कि बंबई शहर की कुल जनसंख्या में मराठी लोगों का बहुमत नहीं है। बंबई की कुल जनसंख्या बहुत भारी है (देखें सांख्यिकीय परिशिष्ट)। मराठी - भाषी लोग 48 प्रतिशत हैं।

जो इस प्रकार का तर्क देते हैं, वे उस तर्क की कमजोरी को महसूस नहीं करते।

निःसंदेह, बंबई नगर में मराठी - भाषी लोग 50 प्रतिशत से कम हैं, लेकिन इसका मूल्यांकन दो कारकों से किया जाना चाहिए। एक तो यह है कि भौगोलिक दृष्टि से कोई यह मानने से इन्कार नहीं करेगा कि बंबई महाराष्ट्र का ही एक भाग है, चाहे महाराष्ट्रीयों का शहर के अंदर अल्पमत ही है। यहां तक कि श्री मोरारजी देसाई ने भी गुजरात प्रदेश कांग्रेस