5. भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - Page 197

180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

दूसरा मुद्दा यह है : यदि नगर की संपन्नता में गिरावट आ जाए - चाहे वह पूंजी के पलायन के कारण हो या व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लोप से - तो बंबई में रहने वाले महाराष्ट्रियों के जीवन - स्तर पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा? महाराष्ट्रियों को यह नहीं भूलना चाहिए - चाहे इससे उनके स्वाभिमान को ठेस क्यों न पहुंचती हो - कि वे क्लर्कों और कुलियों के देश में रहते है। किसी पतनशील नगर में उन्हें कौन रोजगार देगा?

महाराष्ट्रियों को बंबई के प्रश्न पर इसी दृष्टि से विचार करना चाहिए। एक सूक्ति हैः

सर्वनाशे समुत्पन्ने अर्ध त्यजति पंडितः।

बंबई नगर को पृथक राज्य का दर्जा दिए जाने के लिए एक और कारण भी है। अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति के लोग जो गांवों में रहते हैं, उन पर बहुसंख्यक समुदाय के लोग अत्याचार करते हैं, उनका उत्पीड़न करते हैं, यहां तक कि वे उनकी हत्या भी कर देते हैं। अल्पसंख्यक समुदायों को शरण चाहिए, एक ऐसा सुरक्षित स्थान चाहिए जहां वे बहुसंख्यक समुदाय के अत्याचार से सुरक्षित रह सकें। यदि संयुक्त महाराष्ट्र बन जाए जिसमें बंबई शामिल हो, तो वे अपनी सुरक्षा के लिए कहां जाएंगे?

इसी प्रकार का अत्याचार उस समय गांवों में रहने वाले ब्राह्मणों, मारवाडि़यों और गुजरातियों के साथ किया जाता था, जब गोडसे ने गांधी जी की हत्या की थी। सभी ब्राह्मण, मारवाड़ी और गुजराती, जो किसी समय गांवों में रहते थे, वहां से भाग निकले। जो अब शहरों - कस्बों में रहते हैं और सुरक्षित हैं और अपने अनुभवों को भुलाकर संयुक्त महाराष्ट्र की मांग कर रहे हैं।

मैं समझता हूं कि यदि महाराष्ट्रीय फिलहाल कांग्रेस आला कमान का निर्णय मान लें, तो उनके लिए यह हितकर सिद्ध होगा।

महाराष्ट्रियों को बंबई के हाथ से निकल जाने पर कोई डर नहीं होना चाहिए। महाराष्ट्रियों को कोई भी बंबई से वंचित नहीं कर सकता, न ही उन्हें बंबई से बाहर निकाल सकता है।

बंबई की पृथक राज्य के रूप में रचना पर जो असली आपत्ति है, उसका कारण यह है कि ‘बंबई‘ नाम से यह अर्थ नहीं निकलता कि यह महाराष्ट्र का ही एक अंग है। इसी आपत्ति का निराकरण करने के लिए मेरा यह सुझाव है कि बंबई के नए राज्य का नाम बदल कर इसे कोई और नाम दे दिया जाए, जिससे महाराष्ट्र का बोध होता हो।

मान लीजिए, इस सुझाव के अनुसार यह कहने के बजाए कि बंबई को एक पृथक राज्य बना दिया जाए, यदि यह कहा जाए कि महाराष्ट्र को चार राज्यों में विभक्त कर दिया जाए (1) महाराष्ट्र नगर - राज्य (जो बंबई नगर है), (2) पश्चिमी महाराष्ट्र, (3) मध्य महाराष्ट्र, और (4) पूर्वी महाराष्ट्र; तो बंबई की पृथक राज्य के रूप में रचना करने पर क्या आपत्ति हो सकती है?