भाषावार राज्यों के संबंध में विचार
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इसका मतलब भी तो बंबई का पृथक्करण ही होगा। नगर के नाम में इस प्रकार का परिवर्तन किए जाने पर मैं यह जानना चाहूंगा कि ऐसा कौन महाराष्ट्रीय होगा, जिससे इस आधार पर कि इस योजना से बंबई महाराष्ट्र से पृथक हो जाएगा, बंबई की पृथक नगर - राज्य के रूप में रचना पर आपत्ति हो? यह कह देना कि बंबई को एक पृथक राज्य बना दिया जाए, ऐसा ही है, जैसे यह कहा जाए कि महाराष्ट्र को चार राज्यों में विभक्त कर दिया जाए। यदि महाराष्ट्र को दो या तीन राज्यों में विभक्त करने पर कोई आपत्ति नहीं है, तो उसके चार भागों में विभक्त कर देने पर क्या आपत्ति हो सकती है? मुझे तो कोई आपत्ति दिखाई नहीं देती। भाषा में समानता की दृष्टि से मेरा सुझाव है कि कलकत्ता को बंगाल राज्य - नगर और मद्रास को तमिल राज्य - नगर के नाम दिए जाएं।
महाराष्ट्रियों और गुजरातियों के बीच तनाव की स्थिति दूर करने के लिए मैंने यह सुझाव दिया है।
महाराष्ट्र नगर - राज्य अधिशेष राज्य होगा। जो लोग संयुक्त महाराष्ट्र की मांग करते हैं जिसमें बंबई शामिल हो, उन्हें इस अधिशेष से महाराष्ट्र के लिए लाभ मिलने की आशा है।
नगर - राज्य का अधिशेष राजस्व इन दो करों से मिल सकता है (1) संपत्ति कर, और (2) विद्युत कर। यदि बंबई पृथक नगर - राज्य बन जाए तो क्या इन दो स्रोतों से प्राप्त राजस्व का विनियोजन महाराष्ट्र अपने लिए कर सकता है?
बंबई नगर - राज्य संपत्ति कर में से संपत्ति कर की आय ले लेना संभव ही नहीं है। यह स्थानीय कर है, जो स्थान विशेष में स्थित संपत्ति पर लगाया जाता है। इस कर से प्राप्त आय का अधिकारी वही राज्य हो सकता है, जिसमें वह सम्पत्ति स्थिति हो।
जहां तक विद्युत कर का संबंध है, उसमें स्थिति भिन्न है।
जब गुजरात और महाराष्ट्र अलग हो जाएं - और जो हो ही जाएंगे - तो गुजरात अपने ही राज्य में उत्पन्न और खर्च होने वाली बिजली से अर्जित राजस्व की मांग करेगा। महाराष्ट्र अपने ही राज्य में उत्पन्न और खर्च होने वाली बिजली से अर्जित राजस्व का दावा करेगा बंबई नगर भी राज्य होने के नाते यही करेगा। क्या बंबई को इस प्रकार राजस्व हथियाने की अनुमति दी जाएगी? क्या यह न्याय संगत होगा? बंबई नगर बिजली पैदा नहीं करता, वह बंबई शहर के बाहर महाराष्ट्र में पैदा की जाती है। इसलिए बंबई नगर - राज्य को यह अधिकार नहीं है कि वह बिजली से अर्जित समस्त राजस्व खुद ले ले। उचित तो यह है कि ऐसी स्थिति में साधनों के पृथक्करण और आय के विभाजन का सिद्धांत लागू किया जाए जो राज्य वित्त के सभी विद्यार्थी भली प्रकार जानते हैं।
इसे ठोस आधार प्रदान करने के लिए केंद्र को चाहिए कि वह विद्युत का करारोपण अपने अधीन ले ले और होने वाली आय को महाराष्ट्र के चार राज्यों में उनकी आवश्यकता के अनुरूप बांट दें -
(1) बंबई, (2) पश्चिमी महाराष्ट्र, (3) मध्य महाराष्ट्र और (4) पूर्वी महाराष्ट्र