182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
इससे बंबई के पृथक्करण के कारण इन तीनों महाराष्ट्रों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव में कमी आ जाएगी।
| foH | kkt | u |
|---|
संयुक्त या विभाजन
मैं कह चुका हूं कि बंबई को एक नया क्षेत्र देकर इसे एक पृथक नगर - राज्य बना दिया जाए। अब यह प्रश्न रह जाता है कि शेष महाराष्ट्र का क्या किया जाए। मैं बता चुका हूं कि शेष महाराष्ट्र को तीन राज्यों में बांटा दिया जाए।
प्राचील - काल से ही महाराष्ट्र तीन राज्यों में बंटा रहा है। ‘महावंश‘ में अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भारत के विभिन्न भागों में भेजे गए प्रचारकों के संदर्भ में इस तथ्य का उल्लेख है। लेकिन आगे चलकर पाली साहित्य में ‘त्रय महाराष्ट्रिका‘ अथवा तीन महाराष्ट्रों का हवाला दिया गया है। इससे पता चलता है कि पुरातन - काल से ही तीन महाराष्ट्र चले आते हैं। इसलिए मेरा प्रस्ताव कुछ नया नहीं है। जनसंख्या, क्षेत्र और राजस्व का विभाजन अगले पृष्ठ पर दी गई तालिका में दर्शाया गया है। संलग्न मानचित्र सं. 5 में तीनों खंडों में से प्रत्येक का क्षेत्रफल और सीमाएं बताई गई हैं।
फिलहाल क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से इन तीन खंडों में कोई बात आपत्तिजनक नहीं प्रतीत होती। आदिकाल से ही इन्हें ‘त्रय महाराष्ट्र‘ की कहा जाता रहा है।
इस प्रकार के विभाजन से भाषा के सिद्धांत पर कोई आंच नहीं आती। वास्तव में, यदि इन तीनों महाराष्ट्रों की एक ही भाषा हो तो इससे मराठी भाषा के विकास में भी सहायता मिलेगी, बशर्ते कि ऐसा करना उन तीनों के लिए संभव हो।
जहां तक इसकी व्यवहार्यता का प्रश्न है, उस पर मैं आगे चलकर विचार करूंगा। मेरा इरादा इस पर अलग से एक विशेष अध्याय लिखने का है। उस जमाने में बंबई को कौन जानता था? वरना वही महाराष्ट्र का चौथा भाग होता।
शेष तीन भागों से जिसे मैंने पूर्वी महाराष्ट्र कहा है, पहले ही से पृथक राज्य बन चुका है। आवश्यकता इस बात की है कि इसे अलग ही रहने दिया जाए। इसकी एक सुव्यवस्थित प्रशासन व्यवस्था है, सुव्यवस्थित राजस्व व्यवस्था है और सुव्यवस्थित न्यायिक व्यवस्था है या हिन्दी - भाषी लोगों के बंधन से मुक्त हो चुका है।
अब एक ही समस्या शेष है कि महाराष्ट्र के अधीन आने वाले उस क्षेत्र को जो इस समय बंबई राज्य का भाग है और हैदराबाद राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र को किस प्रकार विभक्त किया जाए।
इन दोनों का एक ही में विलय करने और उसे तीसरे से जोड़ने के बजाए जिसे मैं पूर्वी महाराष्ट्र कहता हूं, बंबई के महाराष्ट्र वाले भाग और मराठवाड़ा को दो समान राज्यों में क्यों न विभक्त कर दिया जाए? मेरी यही योजना है। मैं बंबई राज्य के महाराष्ट्र वाले भाग के छह जिलों को अंतरित करके उसे मराठवाड़ा का भाग बनाना चाहता हूं (देखें मानचित्र