5. भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - Page 202

भाषावार राज्यों के संबंध में विचार

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बंबई की विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 315 है, जिसमें से 149 सदस्य मराठी - भाषी हैं। बंबई की विधान परिषद में सदस्यों की कुल संख्या 72 है, जिसमें 34 मराठी - भाषी हैं। जाहिर है कि बंबई राज्य का मुख्यमंत्री - मराठी - भाषी होना चाहिए था। श्री हीरे मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए थे, लेकिन उन्हें कांग्रेस की आला कमान ने बिठा दिया। न केवल श्री हीरे को बिठा दिया गया, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री के पद के लिए मोरारजी देसाई का नाम प्रस्तावित करने के लिए बाध्य किया गया। एक महाराष्ट्रीय नेता का यह कैसा निरादर थ। और यह भी देखने की बात है कि कांग्रेस की आला कमान की दृष्टि में महाराष्ट्रियों की राजनीतिक सूझबूझ का कितना मूल्य है? मराठा मंत्रियों की यही अक्षमता विषयों के उस विभाजन से भी स्पष्ट हो जाती है, जिसका निर्देश पहले किया जा चुका है।

उपरिलिखित तथ्यों से यह स्पष्ट हो जाता है कि मराठों में राजनीतिक सूझबूझ की कमी है। उनमें कोई भी तिलक या गोखले या रानाडे जैसा प्रतिष्ठित नहीं हैं। आज महाराष्ट्रीय की कोई कीमत नहीं है। कांग्रेस में जो महाराष्ट्रीय हैं उनको कोई नहीं पूछता। इसलिए यह परमावश्यक है कि महाराष्ट्रियों को राजनीति में प्रशिक्षण दिया जाए। यह राजनीतिक प्रशिक्षण जनता को सत्ता का हस्तांतरण हो जाने के कारण बुनियादी महत्व का बन गया है। ‘मराठा‘ शब्द का प्रयोग दो अर्थों में किया जाता है : एक अर्थ में तो इससे तात्पर्य उन सब लोगों से होता है, जो मराठी - भाषा बोलते हैं। दूसरे अर्थ में उसका अभिप्राय उन लोगों से हेता है, जो जाति के मराठे हैं। वे सभी मराठे कहलाते हैं। लेकिन लोग मराठी बोलने वाले मराठों और जाति के मराठों में अंतर नहीं समझते।

जो लोग महाराष्ट्र पर शासन करने वाले हैं, वे भाषा के कारण मराठे नहीं हैं, बल्कि मराठा जाति के हैं, चाहे ब्राह्मणों की आशाएं कुछ भी क्यों न हों। अब इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता कि मराठे राजनीतिक दृष्टि से सबसे अधिक पिछड़े हुए समुदाय के लोग हैं। यह एक बुनियादी बात है कि उन्हें राजनीतिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। यदि एक ही महाराष्ट्र हो तो केवल एक ही मराठे को मुख्यमंत्री के पद के लिए और पांच - छह को मंत्री पद के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है। इसके विपरीत यदि तीन महाराष्ट्र राज्य हों तो तीन मराठों को मुख्यमंत्री के रूप में और तीस मराठों के पद के लिए प्रशिक्षण दिया जा सकता है। हम अपने नेताओं को शिक्षित करने में सहायता देकर वास्तव में अपनी ही सेवा कर सकते हैं।

मराठों को शिक्षित करने का एक ही तरीका है कि उन्हें अपनी क्षमताओं का विकास करने और उन क्षमताओं का उपयोग करने के लिए और अधिक अवसर प्रदान किए जाएं। तीन महाराष्ट्रों की रचना से ही यह संभव हो सकता है।

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