186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
उसे घुमाने के लिए जंगल में ले गया। बच्ची ने देखा कि बड़े पेड़ों की जड़ में छोटी - छोटी झाडि़यां उग आई हैं। जब वैसी ही झाडि़यां उसे हर पेड़ के नीचे दिखाई पड़ीं, तो उसने अपने बाप से पूछा कि बड़े पेड़ों के नीचे ये छोटी झाडि़यां बढ़ती क्यों नहीं। चूंकि बाप वनस्पति विज्ञानी नहीं था, इसलिए उसके प्रश्न का उत्तर न दे सका और उसने कहा, ‘‘अरे मैं क्या जानूं?‘‘ लेकिन फिर भी उसने महसूस किया कि बच्ची का सवाल बहुत सार्थक है। वह किसी कालिज में अध्यापक था। दूसरे दिन जब वह कालिज गया तो उसने वनस्पति विज्ञानी के अपने साथ से वही प्रश्न किया। वनस्पति विज्ञानी ने उत्तर दिया, ‘‘अरे, इसका जवाब तो बहुत आसान है। बड़े वृक्ष सूर्य की सारी किरणों का फायदा खुद ही उठा लेते हैं और झाडि़यां किरणों से वंचित रह जाती हैं। यही कारण है कि वे पनप नहीं पातीं।‘‘ मराठवाड़ा के लोगों के इस कहानी से जो शिक्षा मिलती है, उसे नहीं भूलना चाहिए।
संयुक्त महाराष्ट्र के पक्ष में केवल एक ही तर्क है और वह यह कि यह रामायण में वर्णित, राम और भरत, दो भाइयों के लंबे विछोह के बाद हुए पुनर्मिलन जैसा है। यह मूर्खतापूर्ण तर्क है, जिस पर ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
कुछ ऐसे महाराष्ट्रीय भी हैं जो पश्चिमी महाराष्ट्र के साथ ऐसी राजनीतिक संधि करके संतुष्ट हैं, जिसमें उन्हें कुछ रियायतें दी गई हैं। संधियों का महत्व कागज की रद्दी से बढ़कर कुछ नहीं होता। उन्हें लागू नहीं किया जा सकता। राजनीतिक संधियां करने के बजाए जो लागू नहीं की जा सकतीं, क्या यह बेहतर नहीं है कि शक्ति हाथ में आ जाए?
बंबई सरकार में महाराष्ट्रियों ने जो कुछ किया है, वह कितना घटिया और तुच्छ है। यदि महाराष्ट्रियों के अत्युन्नत ओर सुशिक्षितजनों का यह व्यवहार है तो मराठवाड़ा के लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है?
मैं मराठवाड़ा या मध्य महाराष्ट्र के लोगों को यह परामर्श देना चाहता हूं कि अपने ही राज्य के लिए आग्रह करें, ताकि वे अपना भाग्य संवार सकें।
खोए हुए क्षेत्र की पुनर्प्राप्ति
क्या सभी मराठी भाषी लोगों के एक ही राज्य में ठूंस दिया जाए? या उन्हें दो या उससे अधिक राज्यों में बांट दिया जाए।
अगला प्रश्न यह है कि बंबई के पृथक्करण के बाद शेष बचे भाग का क्या किया जाए। शेष भाग के भी दो हिस्से हैं : (1) गुराजत और (2) महाराष्ट्र। मेरी चिंता महाराष्ट्र के बारे में है। आयोग ने भाषायी प्रांतों की रचना करते समय मराठी भाषी क्षेत्र गैर - मराठी भाषी क्षेत्रों को दे दिए हैं। इस प्रकार सम्मिलित न किए गए क्षेत्रों की संख्या इस प्रकार है :
बेलगाम ताल्लुक बेलगाम शहर सहित
खानपुर ताल्लुक
चिकोरी ताल्लुक जिसमें निपानी शामिल हैं