5. भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - Page 204

भाषावार राज्यों के संबंध में विचार

  1. सूप ताल्लुक

  2. कारवार ताल्लुक

  3. बीदर में निलंग ताल्लुक

  4. बीदर में अहमदपुर तहसिल

  5. बीदर में उदगीर तहसिल

  6. आदिलाबाद में राजगीर तहसिल

  7. विदर्भ का कुछ भाग, जो पड़ोसी हिन्दी - भाषी राज्य को दे दिया।

187

जिन महाराष्ट्रियों को महाराष्ट्र से अलग किया गया है, उनकी संख्या 13,89,648 है।

आयोग को बंबई के मिश्रित राज्य को रोके रखने के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण उद्देश्य पूरे करने पड़े थे। एक था, बंबई को महाराष्ट्रियों के हाथों में न जाने देने का। आयोग ने ऐसा एक मिश्रित राज्य स्थापित करके किया। दूसरा काम उन्होंने यह किया कि महाराष्ट्रियों और गुजरातियों के बीच समानता स्थापित की। बंबई राज्य की भावी विधानसभा में इन दोनों में समानता जो आयोग की योजना का ही एक अंग थी बहुत आवश्यक थी, क्योंकि पुरानी विधानसभा में कर्नाटक के सदस्य, जिन पर गुराजती अपने बहुमत के लिए निर्भर थे, नए कर्नाटक राज्य में उन्हें नहीं मिल पाते। आयोग ने मराठी - भाषी लोगों को गैर मराठी - भाषी राज्यों के सुपुर्द करके महाराष्ट्र के पंख काट दिए। इस प्रकार की राजनीतिक बर्बरता का और कोई कारण नहीं जान पड़ता।

आयोग ने महाराष्ट्र के साथ जो यह अन्याय किया, उसका अब प्रतिकर किया जाना चाहिए, और सौभाग्य की बात है कि ऐसा करना संभव भी है। मिश्रित राज्य के प्रस्ताव की अब कोई प्रासंगिकता नहीं है, न ही महाराष्ट्रियों और गुजरातियों के बीच समानता आवश्यक रही है।

v /;k;
d s
d k

समस्या के सिद्धांतों का सारांश

पाठक की सुविधा के लिए मैं नीचे उन सिद्धांतों का सार प्रस्तुत कर रहा हूं, जो भाषायी राज्यों की रचना के मूल में होने चाहिएं। उनका पिछले पृष्ठों में उल्लेख हो चुका है, लेकिन वे बिखरे हुए हैं। यहां मैं उन्हीं सिद्धांतों को दोहराता हूं :

(1) मिश्रित राज्य अपनाने का विचार सर्वथ त्याग दिया जाना चाहिए।

(2) प्रत्येक राज्य एक भाषी होना चाहिए, अर्थात् एक राज्य, एक भाषा।

(3) एक राज्य, एक भाषा के फार्मूले को एक भाषा, एक राज्य से गड्डमड्ड नहीं

करना चाहिए।

(4) एक भाषा, एक राज्य के फार्मूले का अर्थ यह है कि सभी लोग जो एक