192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
समुदाय के प्रत्याशी को देकर स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करता है। यह एक
और कारण है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय का उम्मीदवार चुनाव हार जाता
है।
यह देखा गया है कि कांग्रेस हमेशा विजयी होती हैं। यह कोई नहीं पूछता कि कांग्रेस ही क्यों जीतती है? इसका एक ही उत्तर है कि कांग्रेस बहुत लोकप्रिय है। लेकिन कांग्रेस लोकप्रिय क्यों है? इसका सही उत्तर यह है कि कांग्रेस हमेशा ऐसे उम्मीदवार खड़े करती है जो उन जातियों के हैं, जिनका निर्वाचन क्षेत्र में बहुमत है। जाति और कांग्रेस का चोली - दामन के साथ है। कांग्रेस की जीत का एकमात्र कारण यह है कि वह जाति व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाती है।
जाति व्यवस्था के ये अशुभ परिणाम भाषायी राज्यों की रचना के फलस्वरूप निश्चय ही और भी गहरे हो जाएंगे। अल्पसंख्यक समुदायों को कुचल दिया जाएगा। यदि कुचला गया तो उन पर अत्याचार होगा और इनका उत्पीड़न किया जाएगा। उनके साथ भेदभाव बरता जाएगा और उनके साथ कानून की दृष्टि में न समानता का व्यवहार किया जाएगा, न सार्वजनिक जीवन में उन्हें बराबरी के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
लार्ड एक्टन ने राष्ट्रों के इतिहास और उनकी विचारधाराओं में होते आए परिवर्तनों का अच्छा वर्णन किया है :
प्राचीन यूरोपीय व्यवस्था में राष्ट्रों के अधिकारों को न तो सरकारें मान्यता देती थीं
और न ही जनता उनकी बलपूर्वक मांग करती थी। राष्ट्रों का नहीं, बल्कि शासक
परिवारों का हित शासन के नियंत्रण का आधार था और प्रशासन चलाते समय जनता
की इच्छाओं का कोई ख्याल नहीं रखा जाता था। जहां हर प्रकार की स्वतंत्रता को
दबाया जाता है, वहां राष्ट्रीय स्वाधीनता की मांगों की उपेक्षा किया जाना भी आवश्यक
होता है और फेनेलन के कथनानुसार इस युग में राजकुमारी राजतंत्र तो अपने दहेज
के साथ ले जाती थीं।
राष्ट्र पहले तो बहुत निर्जीव से थे, लेकिन जब उनमें चेतना आई तो :
वे पहले तो अपने वैध शासकों की रक्षा के लिए उनके विजेताओं के विरुद्ध उठ खड़े
हुए। उन्होंने अपहर्ताओं का शासन स्वीकार नहीं किया। आगे चलकर ऐसा समय आया,
जब उन्होंने इसलिए बगावत का झंडा उठाया कि उनके शासकों ने उनके साथ अन्याय
किया था। इस प्रकार के विद्रोहों के भड़कने का कारण कुछ ऐसी शिकायतें थीं, जो
निश्चित रूप से सिद्ध हो चुकी थीं उसके बाद फ्रांस की क्रांति हुई, जिससे सब कुछ
बदल गया। उसी ने जनता को यह सीख दी कि वे अपनी इच्छाओं आवश्यकताओं
को अपने उस अधिकार का सर्वोच्च मापदंड मानें, जिनके अनसुर वे जो कुछ करना
चाहें, कर सकते हैं। उसने जनता की प्रभुसत्ता के विचार का उद्घोष किया, जिसे न
अतीत नियंत्रित कर सका था और न ही तत्कालीन राज्य।