194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
परित्याग कर दिया गया है। मेमनों के शरीर से ऊन उतार ली गई है। वे ठिठुर रहे हैं। उन पर कुछ ऊन चढ़ानी जरूरी है।
पृथक निर्वाचक मंडल अथवा स्थानों का आरक्षण नहीं किया जाना चाहिए। केवल बहुसदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र (दो या तीन के) पर्याप्त हैं, जिनमें एकल सदस्य निर्वाचन क्षेत्र प्रणाली के बजाए, जो वर्तमान संविधान में सम्मिलित हैं, संचित मतदान की व्यवस्था हो। इससे भाषायी राज्यों के बारे में अल्पसंख्यकों के जो भय हैं, वे दूर हो जाएंगे।
भाग V
दूसरी राजधानी की आवश्यकता
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उत्तर तथा दक्षिण के बीच तनाव दूर करने का उपाय
क्या भारत दूसरी राजधानी बनाने में समर्थ है? यह कह देने से कि भारत की इस समय एक राजधानी है, समस्या से पिंड नहीं छुडाया जा सकता। यदि भारत की राजधानी ऐसे स्थान पर स्थित नहीं हैं, जो सभी के लिए संतोषजनक हो, तो अब समय आ गया है कि इस प्रश्न पर विचार किया जाए।
अंग्रेजों के भारत छोड़ने के बाद से अब तक भारत की एक ही राजधानी रही है और वह दिल्ली है। अंग्रेजों के आगमन के पहले भारत की हमेशा दो राजधानियां रही हैं। मुगलों के शासनकाल में भारत की दिल्ली में एक राजधानी थी और कश्मीर में श्रीनगर दूसरी। जब अंग्रेज आए, तब उनकी भी दो राजधानियां थी, एक कलकत्ता और दूसरी शिमला। जब वे कलकत्ता छोड़कर दिल्ली आ गए, तब भी उन्होंने शिमला को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए रखा। जो दो राजधानियां मुगलों और अंग्रेजों ने कायम रखीं, उनका कारण जलवायु संबंधी परिस्थितियां थीं। चाहे अंग्रेज हों या मुगल, किसी के लिए भी लगातार बारह महीनों तक दिल्ली या कलकत्ता में रहना संभव नहीं था। दिल्ली की गर्मी मुगलों के लिए असह्य थी, इसीलिए उन्होंने गर्मी के महीनों के लिए श्रीनगर को अपनी दूसरी राजधानी बनाया, इसी प्रकार कलकत्ता की गर्मी अंग्रेज सहन नहीं कर सकते थे। इसलिए उन्होंने भी एक दूसरी राजधानी स्थापित की। मौसम की इन परिस्थितियों में अब तीन और परिस्थितियां जोड़ी जानी चाहिए। मुगलों या अंग्रेजों के राज्य में जनता की सरकार नहीं थी। लेकिन अब हमारे यहां जनता का राज्य है और उसी जनता की