244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
के बनाने में मनुष्य को कोई स्थान प्रदान करने से इन्कार करते हैं। संकट - काल का मुकाबला नए तरीकों की खोज से किया जा सकता है। जब कोई नया मार्ग व तरीका नहीं मिलता तो समाज का पतन हो जाता है। समय संभावित नवीन मार्ग प्रस्तुत कर सकता है। परंतु सही मार्ग पर चलना समय का काम नहीं है। यह काम मनुष्य का है। अतएव मनुष्य इतिहास के निर्माण का एक साधन है और पर्यावरण संबंधी शक्तियों के, चाहे दैवी हों या सामाजिक, भले ही सर्वप्रथम हों, पर वे अंतिम चीज नहीं हैं।
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महापुरुष किसे कहा जा सकता है? यदि पूछा जाए कि क्या सिकंदर, अत्तिला सीजर तथा तैमूरलंग जैसे शूरवीर योद्धा हैं, तो प्रश्न का उत्तर देना कठिन नहीं है। वीर योद्धा युग निर्माता होते हैं और व्यापक परिवर्तन लाते हैं। वे अपनी विजय के प्रचंडनाद से अपने समकालीन व्यक्तियों को स्तंभित और चकित कर देते हैं। वे महान हो जाते हैं। वे इसकी प्रतीक्षा नहीं करते कि लोग उन्हें महान कहें। जैसे हिरनों के बीच में शेर होता है, वैसे ही वे मनुष्यों के बीच होते हैं। परंतु यह बात भी उतनी ही सच है कि मानव - जाति के इतिहास पर उनका स्थायी प्रभाव बहुत ही कम होता है। उनकी विजय संकुचित हो जाती है और यहां तक कि नेपोलियन जैसे महान सेनानायक को भी अपनी समूची विजय सफलताओं के बाद फ्रांस को मूल से भी लघु आकार में देखना और छोड़ना पड़ा। जरूरत पड़ने पर जब उन पर कुछ दूरी से दृष्टिपात किया जाता है तो विश्व के समूचे कार्य - व्यापार में वे केवल सामयिक महत्व की दीख पड़ती हैं और जिस समाज में घटित होती हैं, उस पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं डालतीं। उनके जीवन तथा नैतिक आचरण का वृत्त रोचक हो सकता है, परंतु वे समाज को प्रभावित नहीं करते और समूचे समाज के स्वरूप के बदलने के लिए वे कोई प्रभाव नहीं छोड़ते तथा कोई परिवर्तन नहीं लाते।
जब प्रश्न किसी ऐसे व्यक्ति के विषय में पूछा जाता है जो सेनाध्यक्ष नहीं है तो उत्तर देना कठिन हो जाता है। क्योंकि उस समय यह प्रश्न जांच व कसौटी का प्रश्न हो जाता है और अलग लोगों की अलग - अलग जांच व कसौटी होती है।
नायक - पूजा के प्रबल पक्षधर कार्लाइल की अपनी एक निजी कसौटी व जांच थी। उन्होंने निम्नलिखित शब्दों में उसका उल्लेख किया है :
‘‘लेकिन विशेष रूप से महापुरुष के बारे में मैं अति आग्रह से यह कहने का साहस करूंगा कि इस पर तो विश्वास किया ही नहीं जा सकता कि वह सत्यनिष्ठ के अलावा वह कुछ और भी हो सकता है ख्........., कोई व्यक्ति तभी समर्थ होगा, जब, वह सर्वप्रथम सत्यनिष्ठ हो, उसे मैं निष्ठावान व्यक्ति कहूंगा निष्ठा कैसी गहन, अति खरी निष्ठा। सभी वीर - गुण् ा व्यक्तियों का सर्वोपरि प्रधान लक्षण है।‘‘
कार्लाइल ने निःसंदेह सच्चाई की अपनी कसौटी की परिभाषा विशेष रूप से स्पष्ट