6. रानाडे, गांधी और जिन्ना - Page 285

268 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

के अधीन सदियों तक रखा जाए जब तक इन प्रभावों तथा प्रतिबंधों का उद्देश्य बना रहे कि वे उन दिशाओं में लोगों की शक्ति तथा चरित्र के निर्माण में स्थायी सहयोग देते रहें, जिनमें कि भारतीय जातियां अति प्रभाव - ग्रस्त हैं। एक बात निश्चित है कि 500 वर्ष तक बने रहने के पश्चात् मुस्लिम साम्राज्य ढह गया और उसके कारण पंजाब तथा पूरे मध्य भारत और दक्षिणी भारत की पुरानी मूल जातियों को पुनः स्थापित होने का अवसर मिला। पुनः स्थापना के ये आधार पर आधारों से कहीं अधिक ठोस स्वरूप के थे, जिन्होंने प्रारंभिक मुस्लिम विजेताओं के आगे बड़ी आसानी से घुटने टेक दिए थे।‘‘

‘‘हिन्दु तथा मुसलमान, दोनों में ही उनके अनेक गुणों का अभाव है, जो व्यवस्था तथा सुव्यवस्थित सत्ता के प्रति प्रेम के परिचायक होते हैं। दोनों में अभाव हैं। वे नागर स्वतंत्रता से प्रेम नहीं करते। वे नागरिक जीवन के लिए आवश्यक गुणों का पालन नहीं करते। यांत्रिक कौशल के प्रति उनकी अभिरुचि नहीं है। विज्ञान और शोध में उनकी रुचि नहीं है। साहसपूर्ण खोज का उनमें साहस नहीं है। कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने का उनमें संकल्प नहीं है, तथा महिलाओं के प्रति उदात्त सम्मान की भावना उनमें नहीं है। पुरानी हिन्दू और पुरानी मुस्लिम सभ्यता की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उसमें इन गुणों का प्रशिक्षण ऐसे तरीके से दिया जा सकता, जिससे भारत की जातियों को पश्चिमी यूरोप की जातियों के स्तर तक लाया जा सके। इसलिए शिक्षा के कार्य का पुनर्वीकरण करने की आवश्यकता पड़ी और अब यह कार्य विगत शताब्दी से भी अधिक समय से ब्रिटिश छत्रछाया में चल रहा है, जिसका परिणाम हम सबके सामने है।‘‘

इन बयानों पर केवल सरसरी दृष्टि डालने मात्र से ही हमें यह पता चल जाएगा कि यह आरोप बयानों को गलत पढ़ने के कारण नहीं, बल्कि उन्हें गलत समझने के कारण लगाया जाता है। बयान साफ तथा सीधा - साधा है। उसके विषय में अनुमान से भी यह नहीं कहा जा सकता कि उससे यह निष्कर्ष निकलता है कि रानाडे भारत की स्वतंत्रता के विरुद्ध थे। उस अर्थ में यह आरोप झूठा और निराधार है।

रानाडे के इन बयानों से उनके आत्म - सम्मान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वे तो उनकी बृद्धिमत्ता तथा दूरदर्शिता को प्रमाणित करते हैं। इन बयानों से रानाडे क्या बताना चाहते थे? जैसा मैं समझता हूं मेरा विचार है कि रानाडे दो बातें बताना चाहते थे। पहली बात वह यह बताना चाहते थे कि ब्रिटेन की भारत पर जीत ने भारत को अपने आर्थिक तथा सामाजिक ढांचे का पुनर्निर्माण करने, नवीकरण करने तथा सुधार करने के लिए समय व अवसर तथा आवश्यक सुरक्षा प्रदान की, जिससे भारत स्वतंत्र होने के लिए किसी भी विदेशी आक्रमण के दबाव को सहन करने के लिए पुनः सक्षम बन सके। दूसरी बात रानाडे यह बताना चाहते थे कि भारत जब तक एक राष्ट्र के रूप में स्वयं को संतोषजनक रूप से सुसंगठित न कर ले, वह विचार तथा भावना से एकजुट न हो जाए और समान नियति की भावना से ओत - प्रोत न हो जाए, उससे पहले यदि वह ब्रिटिश साम्राज्य से बाहर निकलता