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रानाडे, गांधी और जिन्ना

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जो व्यक्ति यह सोचते हैं कि चीन की स्थिति भारत के लिए उदाहरण नहीं, बल्कि एक चेतावनी के समान होनी चाहिए, वे रानाडे पर भारत की स्वतंत्रता या विरोध करने के लिए दोषारोपण करने के स्थान पर इस बात से प्रसन्न होंगे कि रानाडे के पास समय से पहले होने वाली क्रांति की बुराइयों का पूर्वानुमान करने और उसी प्रकार के कदम को न उठाने के लिए अपने देशवासियों को चेतावनी देने की बुद्धि थी।

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भावी पीढि़यां महान पुरुषों के अंतिम वचनों और अंतिम पश्चात्तापों में हमेशा रुचि लेती है। महान पुरुषों के अंतिम वचन इस लोक के बारे में उनके अनुभव तथा परलोक संबंधी उनकी अनुभूति के संदर्भ में हमेशा महत्वपूर्ण नहीं होते। उदाहरण के लिए सुकरात के अंतिम विचार ये थे कि उन्होंने क्रिटों को बुलाकर उससे यह कहा, ‘‘हम एसक्युलेपियस को एक मुर्गे के देनदार हैं; उसका कर्जा चुकाना और इसे किसी भी हालत में नहीं भूलना।‘‘ किन्तु महान पुरुषों के अंतिम पश्चात्ताप हमेशा महत्वपूर्ण होते हैं, और वे मनन करने के योग्य होते हैं। नेपोलियन की मनोदशा को लीजिए। सेंट हेलेना में अपनी मृत्यु से पहले नेपोलियन ने तीन महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में अपनी बेचैनी जताई, जो आखिर में उसके पश्चात्ताप बने। वे इस प्रकार थे :

वह अपने जीवन की सर्वोच्च घड़ी में अपने प्राण नहीं छोड़ सका, उसने मिस्र छोड़ा, अपनी पूर्व दिशा में विजय प्राप्त करने की महत्वाकांक्षाओं का त्याग किया और उसका अंतिम पश्चात्ताप जो किसी भी प्रकार से किसी से कम नहीं था, वह था वाटरलू में उसकी हार। क्या रानाडे के मन में कोई भारी पश्चात्ताप थे? एक बात तो निश्चित है कि यदि रानाडे को कोई पश्चात्ताप थे, तो वे उस प्रकार के पश्चात्ताप नहीं थे, जिन्होंने नेपोलियन के मन की शांति भंग कर दी थी। रानाडे सेवा के लिए जीवित रहे, न कि प्रशंसा के लिए, उनके लिए इस बात का बहुत कम महत्व था कि उनकी मृत्यु उनके यशस्वी तथा गौरवशाली क्षण में हो या अकीर्तिकर क्षण में; या वह एक नायक के रूप में मरें; एक विजेता या स्वामी के रूप में मरें या वे एक साधारण आदमी की तरह मामूली सर्दी - जुकाम से मरें। वास्तव में, रानाडे को कोई पश्चात्ताप नहीं था। अभिलेख से पता चलता है कि रानाडे को किसी ऐसे कार्य या घटना का आभास नहीं था, जिसका उन्हें पश्चात्ताप रहा हो। वे आजीवन प्रसन्न व शांत रहे। परंतु यह पूछना उचित है कि यदि रानाडे आज जीवित हो जाएं तो क्या उन्हें कोई पश्चात्ताप होगा? मुझे विश्वास है कि एक विषय ऐसा है, जिसके संबंध में वह बहुत ही दुखी होंगे, और वह विषय है - भारत में उदार दल (लिबरल पार्टी) की वर्तमान स्थिति।

भारत में उदार दल की इस समय क्या स्थिति है? उदार दल आहत है। वास्तव में, यह बहुत नरम अभिव्यक्ति है। उदारवादी भारतीय राजनीति के ‘तिरस्करणीय व्यक्ति‘ हैं। नॉर्टन द्वारा एक अन्य संदर्भ में प्रयुक्त शब्दों में कहें तो उन्हें न जनता ने अपनाया और न ही सरकार ने। उनमें इन दोनों में से किसी की भी अच्छाई नहीं है, किन्तु दोनों की