274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
उदार दल विफल क्यों हुआ है? क्या रानाडे के दर्शन में कोई त्रुटि है? क्या उदार दल के लोगों में कोई दोष या उदारदल की कार्यप्रणाली में कोई दोष है? मेरा अपना यह मत है कि रानाडे के दर्शन में व उनकी विचारधारा में कोई बुनियादी दोष नहीं है। यह भी नहीं कहा जा सकता कि इन दोनों में कांग्रेस का ध्येय सर्वोत्तम है और उदार दल के पास सर्वोत्तम व्यक्ति हैं। उदार दल के पास दोनों बातें हैं। मेरे विचार से उदार दल इसलिए विफल हुआ कि उसमें संगठन का पूर्ण अभाव था।
उदार दल के संगठन की कमजोरियों को प्रकट करना अरुचिकर नहीं होगा। पेंडलेंटन हेरिंग ने अपनी पुस्तक - पालिटिक्स आफ डेमोक्रेसी - में यह कहा है कि एक पार्टी का संगठन तीन संकेन्द्रित मंडलों में फैला होता है। केंद्रीय मंडल गुट तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है। इसका दल के संगठन पर नियंत्रण होता है, जिसे उच्च कमान कहते हैं। उसके साथ उसके कार्यकर्ता जुड़े होते हैं। इन कार्यकर्ताओं का मुख्य धंधा यह होता है कि चाहे चालीय अधिकारी के रूप में अथवा सार्वजनिक पद के रूप में हो, पार्टी संगठन के माध्यम से अपना पेट भरें। वे पेशेवर राजनेता कहलाते हैं और पार्टी तंत्र के रूप में काम करते हैं। इस आंतरिक मंडल, अर्थात हाई कमान तथा तंत्र के चारों ओर ऐसे बहुत से लोगों का एक बड़ा घेरा होता है, जो भावात्मक निष्ठा तथा परंपरा के बंधन से दल के साथ बंधे होते हैं। वे दल के द्वारा घोषित सिद्धांतों का आदर करते हैं। वे पार्टी के पेशेवर कार्यकर्ताओं तथा नेताओं के कार्यों की अपेक्षा अपने दल के आदर्शों तथा प्रतीकों के प्रति अधिक सजग रहते हैं। वे दल के आदर्श को वोट देते हैं, दल के रिकार्ड को नहीं। इस दूसरे मंडल के बाहर लोगों का वह विशाल जनसमूह होता है, जो किसी दल से जुड़ा नहीं होता। ये लोग थाली के बैंगन जैसे होते हैं। वे किसी दल से नहीं जुड़ते। इसका कारण यह है कि वे या तो लक्ष्य - विहीन होते हैं, विचार शून्य होते हैं या उनके कोई ऐसे विशेष हित होते हैं, जिनका समावेश किसी भी मंच में नहीं होता। दूसरे मंडल के बाहर जो लोग होते हैं, वे किसी भी राजनीतिक दल के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र होते हैं, वे ही वह पुरस्कार हैं जिसे पार्टी को प्राप्त करना ही चाहिए। इस पुरस्कार को प्राप्त करने के लिए सिद्धांतों को प्रतिपादित करना तथा राजनीति को सूत्रबद्ध करना पर्याप्त नहीं है। लोगों की सिद्ध ांतों तथा राजनीति में रुचि नहीं होती, बल्कि रुचि कार्यों को कार्यरूप देने में होती है। एक दल के लिए यह आवश्यक होता है कि वह संगठित प्रयास कराए। राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने कहा है कि बहुमत शासन वाले स्वशासन में कार्यों को व्यक्तिगत प्रयास से नहीं, बल्कि संगठित प्रयास से पूरा किया जा सकता है। अब देखना यह है कि संयुक्त प्रयास के लिए क्या आवश्यक होता है? इसके लिए यह आवश्यक है कि व्यक्तिगत मत को जनमत में परिणत किया जाए। अतः किसी पार्टी का मुख्य कर्तव्य यह हो जाता है कि जनमत की इस परणति अथवा निर्माण को किसी सिद्धांत विशेष की स्वीकृति का रूप दें। सिद्धांत रूप में राजनीतिक दल जनमत की अभिव्यक्ति तथा कार्यान्वयन के माध्यम होते हैं, परंतु व्यवहार में दल जनमत तैयार करते हैं, उसका मार्गदर्शन करते हैं, उसे प्रभावित करते हैं और प्रायः उसका नियंत्रण करते हैं। वास्तव में, यह दल का मुख्य कार्य होता