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जातिप्रथा - उन्मूलन

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इस सबके बावजूद, जातपांत तोड़क मंडल, जिसके प्रमुख नेता श्री संत राम हैं, के सभी सदस्य किसी भी स्थिति में एकजुट रहकर चलने के लिए दृढ़ - प्रतिज्ञ हैं और अध्यक्ष - पद पर आपकी नियुक्ति के विचार को नहीं छोड़ेंगे। मंडल की बदनामी हुई है।

* * * * *

इन परिस्थितियों में आपका कर्तव्य हो जाता है कि आप मंडल के साथ सहयोग करें। ऐसे समय में जब उन्हें हिन्दुओं की ओर से बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, आप भी उनकी परेशानियों को बढ़ाएं तो यह बहुत ही दुभाग्यपूर्ण होगा।

हमेंं आशा है कि आप मामले पर विचार करेंगे और वही करेंगे, जिसमें हम सभी की भलाई हो।

* * * * * इस पत्र ने मुझे भारी परेशानी में डाल दिया है। मैं नहीं समझ पाया कि मंडल

मेरे भाषण की छपाई के मामले में कुछ रुपयों की खातिर मुझे क्यों रुष्ट कर रहा है। मुझे इस पर भी विश्वास नहीं होता कि सर गोकल चंद नारंग जैसे व्यक्तियों ने मेरे

अध्यक्ष चुने जाने के विरोध स्वरूप त्यागपत्र दे दिया है, क्योंकि मुझे सर गोकल चंद

का निम्नलिखित पत्र प्राप्त हुआ है।

5, मोन्टगुमरी रोड,

लाहौर, 7 - 2 - 36

प्रिय डॉ. अम्बेडकर,

मुझे जातपांत तोड़क मंडल के कार्यकर्ताओं से यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि आपने ईस्टर की छुट्टियों के दौरान लाहौर में होने वाले उनके आगामी वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता करना स्वीकार कर लिया है। यदि आप लाहौर में अपने प्रवास के दौरान मेरे यहां ठहरें तो मुझे बड़ी प्रसन्न्ता होगी। शेष मिलने पर।

आपका,

गोकल चंद नारंग सच्चाई चाहे जो कुछ भी हो, मैं इस दबाव के आगे नहीं झुका। जब मंडल ने देखा

कि मैं अपना भाषण बंबई में ही छपवाने के लिए बराबर आग्रह कर रहा हूं तो मंडल

ने मेरे प्रस्ताव को स्वीकार करने की बजाए मुझे तार द्वारा सूचित किया कि वे श्री हर भगवान को ‘इस मामले पर व्यक्तिगत रूप से बात करने‘ के लिए बंबई भेज रहे हैं।

श्री हर भगवान 9 अप्रैल को बंबई आए।