2. जातिप्रथा-उन्मूलन - Page 49

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

जब मैं श्री हर भगवान से मिला तो मैंने देखा कि वह इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं कहना चाहते हैं। वास्तव में, उन्हें भाषण की छपाई से कोई लेना

- देना नहीं था, चाहे

-

विमर्श के दौरान इस बात का

वह बंबई में छपे या लाहौर में और इसीलिए विचार

कोई उल्लेख भी नहीं किया। हां वह यह जानने के लिए उत्सुक थे कि भाषण की वस्तु क्या है। इससे मुझे विश्वास हो गया कि भाषण के लाहौर में छपवाने से

विषय -

वस्तु को जानना था। मैंने

मंडल का उद्देश्य धन बचाना नहीं, अपितु भाषण की विषय -

उन्हें भाषण की एक प्रति दे दी। वह भाषण के कुछ अंशों को देखकर प्रसन्न नहीं हुए। उन्होंने लाहौर पहुंच कर मुझे जो पत्र लिखा, वह इस प्रकार है :

लाहौर

14 अप्रैल, 1936

प्रिय डाक्टर साहेब,

मैं 12 तारीख को बंबई से यहां लौटा हूं और तभी से मैं लगातार रेल में बताई 5 - 6 रातों तक सो न सकने के कारण अस्वस्थ हूं। यहां पहुंचने पर मुझे पता चला कि आप अमृतसर आए थे। यदि मैं बाहर आने - जाने के लिए ठीक रहता तो मैं वहां आपसे मिलता। मैंने आपका भाषण अनुवाद के लिए श्री संत राम को दे दिया है। उन्होंने इसे बहुत पंसद किया है, किन्तु उन्हें विश्वास नहीं है कि 25 तारीख से पहले इसे छापे जाने के लिए वह इसका अनुवाद कर सकेंगे। कुछ भी हो, इसका व्यापक प्रचार होगा और हमें विश्वास है कि यह सोए हुए हिन्दुओं को जगाएगा।

बंबई में जिस लेखांश की ओर मैंने संकेत किया था, उसे हमारे कुछ मित्रों ने पढ़ा। इस पर उनकी कुछ शंकाएं हैं और हममें से जो लोग बिना किसी अप्रिय घटना के सम्मेलन को समाप्त करना चाहते हैं, उनकी इच्छा है कि कम से कम वेद शब्द को फिलहाल छोड़ दिया जाए। इसका निर्णय मैं आप पर छोड़ता हूं। फिर भी, मुझे आशा है कि आप अपने अंतिम पैरे में इस बात को स्पष्ट करेंगे कि भाषण में व्याप्त विचार आपके अपने हैं और मंडल उनके लिए जिम्मेदार नहीं है। मुझे आशा है कि मेरी इस बात का आप अन्यथा न लेंगे और हमें भाषण की एक हजार प्रतियां उपलब्ध करा देंगे। हम अवश्य ही इनकी कीमत आपको चुका देंगे। इस आशय का एक तार आज मैंने आपको भेजा है। सौ रुपए का एक चैक इस पत्र के साथ संलग्न है। कृपया इसकी पावती भेजें और हमें यथासमय अपने बिल भी भेज दें।

मैंने स्वागत समिति की एक बैठक बुलाई है। मैं उसके निर्णय से तत्काल आपको सूचित करूंगा। आपने भाषण को तैयार करने में जो भारी कष्ट उठाया है, उसके लिए कृपया मेरा हार्दिक धन्यवाद स्वीकार करें। आपकी कृतज्ञता के लिए हम निश्चय ही बहुत ऋणी हैं।

आपका

हर भगवान