88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हुए थे, वह धर्माचरण करते रहे। लेकिन अब वह आमोद-प्रमोद और विषय-भोगों में लिप्त थे। यहां तक कि जब एक दिन उनकी दृष्टि इंद्राणी, अर्थात् इंद्र की पत्नी, पर पड़ी, तब वह उसे पाने के लिए लालायित हो उठे। इंद्राणी ने देवताओं के गुरु अंगिरस वृहस्पति की शरणी ली। वृहस्पति ने इंद्राणी को उसकी रक्षा का वचन दिया। इस हस्तक्षेप को सुनकर नहुष क्रुद्ध हो गए, लेकिन देवताओं ने उन्हें शांत करने का प्रयास किया और कहा कि पराई स्त्री को अपनी पत्नी बनाना पाप-कर्म है। लेकिन नहुष ने उनकी एक न सुनी और अपनी बात पर यह कहकर अड़े रहे कि वह इंद्र से किसी तरह कम नहीं है। उन्होंने कहाः ‘इंद्र ने पूर्व-काल मे यशस्वी ट्टषि-पत्नी अहल्या का उसके पति के जीते-जी सतीत्व नष्ट किया था, तब आपने उसे क्यों नहीं रोका था? जब प्राचीन-काल में इंद्र ने अनेक पाप-कर्म और छल-कपट किए थे, तब उसे क्यों नहीं रोका गया था।’ नहुष ने देवताओं से इंद्राणी को लाने के लिए कहा, लेकिन वृहस्पति ने उसे भेजने से इंकार कर दिया। लेकिन उनके सुझाव पर इंद्राणी ने नहुष से कुछ समय मांग लिया, ताकि इस बीच वह अपने पति की खोज-खबर ले-ले। अनुरोध स्वीकार कर लिया गाय। उसके बाद इंद्र की ओर से देवताओं ने विष्णु से प्रार्थना की। विष्णु ने वचन दिया, ‘यदि इंद्र मेरे लिए यज्ञ करे तो मैं इंद्र को पाप-मुक्त कर दूंगा और उसे पुनः उसका पद दिला दूंगा, और नहुष नष्ट हो जाएगा।’ इंद्र ने तद्नुसार यज्ञ किया और उसका फल इस प्रकार बताया गया है_ ‘वसव (इंद्र) ने ब्रह्म-हत्या के पाप को वृक्षों, नदियों, पर्वतों, पृथ्वी और स्त्री समुदाय में बांट दिया और तब वह कष्टों और पाप से मुक्त होकर स्वाधीन हो गया’ इस प्रकार नहुष को इंद्र के पद से हटा दिया गया।
लेकिन (यहां वर्णन में कोई गड़बड़ी है) उसने निश्चित रूप से शीघ्र ही अपना स्थान प्राप्त कर लिया होगा, क्योंकि कहा जाता है कि इंद्र पुनः नष्ट हो गए और अदृश्य हो गए।
तब इंद्राणी अपने पति की खोज में निकलीं और रात्रि-देवी तथा रहस्यों (रात्रि की देवी और रहस्यों को उद्घाटित करने वाली) की सहायता से उसने इंद्र को खोज निकाला। वह हिमालय के उत्तर में सागर के भीतर स्थित महाद्वीप की एक झील में कमल की नाल में अत्यंत सूक्ष्म रूप से अवस्थित थे। इंद्राणी ने उन्हें नहुष के पापपूर्ण मतव्य की सूचना दी और उनसे कहा, ‘अब आप अपनी शक्ति का उपयोग कीजिए, संकट से मेरी रक्षा कीजिए और देवताओं के राज्य का शासन पुनः अपने हाथ में लीजिए।’ पर इंद्र ने तुरंत कोई हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और कहा कि नहुष बहुत बलवान हो गया है। उसने अपनी