करोड़ों की आबादी को नकारने का प्रयास
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जिन समस्याओं का 1919 में समुचित समाधान नहीं किया गया, उनमें अस्पृश्यों की समस्या भी थी, जो साइमन कमीशन के सामने सुरसा बन कर खड़ी हो गई। अति अप्रत्याशित रूप से लार्ड बर्कनहेड (दिवंगत) ने इस समस्या पर विशेष बल दिया। वह उस समस्त भारत मंत्री थे। साइमन कमीशन की नियुक्ति से ठीक पूर्व ... ख्1, को दिए गए एक वक्तव्य में उन्होंने कहा ... (मूल अंग्रेजी की पांडुलिपि में स्थान
खाली छोड़ दिया गया है µ संपादक)।
स्वाभाविक है कि समस्या साइमन कमीशन के लिए एक विशेष कठोर कर्म बन गई। भले ही यथा प्रस्तुत समस्या प्रतिनिधित्व देने की थी और उस अर्थ में राजनीतिक समस्या थी, पर वास्तव में समस्या यह थी कि अस्पृश्यों की संख्या सुनिश्चित की जाए। क्योंकि जब तक संख्या सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक यह तय नहीं किया जा सकता था कि विधान-मंडल में कितना प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए।
अतः साइमन कमीशन को अस्पृश्यों की संख्या के बारे में सूक्ष्म जांच करनी पड़ी। उसने विभिन्न प्रांतीय सरकारों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र में बसे अस्पृश्यों की संख्या के बारे में विवरणियां प्रस्तुत करें। कौन नहीं जानता कि इन विवरणियों को तैयार करते समय प्रांतीय सरकारों ने विशेष सावधानी बरती। अतः अस्पृश्यों की कुल संख्या के सही होने के बारे में कोई शंका नहीं हो सकती। निम्न सारणी ख्2, अस्पृश्यों की आबादी के आंकड़े उस रूप में दिए गए हैं, जिस रूप में वे साउथबरो कमेटी तथा साइमन कमीशन को प्राप्त हुए।
IV
अतः यह स्पष्ट है कि अस्पृश्यों की आबादी पांच करोड़ के आसपास आंकी गई है। अस्पृश्यों की इतनी आबादी है, इसका पता 1911 के जनगणना आयुक्त ने लगाया। उसकी पुष्टि 1921 के जनगणना आयुक्त ने तथा 1929 में साइमन कमीशन ने की। बीस साल तक यह तथ्य रिकार्ड में दर्ज रहा। उस बीच किसी भी हिंदू ने उसे कभी भी चुनौती नहीं दी। वास्तव में हिंदू दृष्टिकोण को उन विभिन्न कमेटियों की रिपोर्टों के आधार पर मापा जाए, जिन्हें साइमन कमीशन के सहयोग से करने के लिए प्रांतीय तथा केंद्रीय विधान-मंडलों ने नियुक्त किया था, तो इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि उन्होंने इस आंकड़े को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार किया।
लेकिन 1932 में जब लोथियन कमेटी बनी और उसने जांच-पड़ताल शुरू की तो अचानक हिंदुओं ने चुनौती-भरा रुख अपनाया और उसने इन आंकड़ों को सही मानने
मूल अंग्रेजी की पांडुलिपि में तिथि नहीं दी गई है।
मूल अंग्रेजी की पांडुलिपि में सारणी नहीं दी गई है।