6. करोड़ों की आबादी को नकारने का प्रयास - Page 145

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

से इंकार कर दिया। कुछ प्रांतों में तो हिंदुओं ने यहां तक कहा कि वहां तो कोई अस्पृश्य है कि नहीं। यह घटना हिंदुओं की मनोवृत्ति को दर्शाती है। अतः वांछनीय है कि उस पर कुछ विस्तार से चर्चा की जाए।

लोथियन कमेटी की नियुक्ति भारतीय गोलमेज सम्मेलन की मताधिकार संबंधी उप-समिति की सिफारिशों के फलस्वरूप की गई थी। कमेटी ने समूचे भारत का दौरा किया और मध्य प्रांत तथा असम को छोड़कर शेष सभी प्रांतों की यात्रा की। कमेटी की मदद के लिए प्रांतीय सरकार ने हर प्रांत में प्रांतीय कमेटियों का गठन किया। उनमें यथासंभव हर प्रांत में मौजूद विभिन्न विचारधाराओं के विभिन्न राजनीतिक हितों के प्रवक्ता शामिल किए गए। इन प्रांतीय कमेटियों में मुख्य प्रांतीय कौंसिलों के सदस्य थे। उनका अध्यक्ष गैर-सरकारी लोगों को बनाया गया। चर्चा को केंद्रित करने के लिए भारतीय मताधिकार कमेटी ने एक प्रश्नावली जारी की। प्रश्नावली विचारार्थ विषय के क्षेत्र पर आधारित थी। मताधिकार कमेटी ने यह प्रक्रिया निर्धारित की कि प्रांतीय सरकारें प्रश्नावली में उठाए गए मुद्दों पर अपने निजी दृष्टिकोण निर्धारित करें और उनके बारे में कमेटी से चर्चा करें। प्राधिकृत सलाहकार के रूप में मान्य प्रांतीय कमेटियां स्वतंत्र रूप से अपने दृष्टिकोण निर्धारित करें और स्व-विवेक से साक्षियों के लिखित बयानों के आधार पर प्रारंभिक पड़ताल करें। अतः भारतीय मताधिकार कमेटी की रिपोर्ट विस्तृत पड़ताल पर आधारित पूर्ण दस्तावेज है।

प्रधानमंत्री ने भारतीय मताधिकार कमेटी के अध्यक्ष लार्ड लोथियन को एक अनुदेश-पत्र भेजा था। उसमें कमेटी के विचारार्थ विषय का उल्लेख था। उसमें यह विचार व्यक्त किया गयाः

(भारतीय गोलमेज सम्मेलन) में विभिन्न मुद्दों के बारे में जो चर्चाएं हुईं,

उनसे स्पष्ट हो गया है कि नए संविधान में दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व के बारे में

पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी और अब नामांकन द्वारा प्रतिनिधित्व की पद्धति को

उपयुक्त नहीं माना जाता है। जैसा कि आपको मालूम ही है, इस बारे में मतभेद

है कि दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक-मंडलों की व्यवस्था की जाए या

नहीं। अतः आपकी कमेटी की जांच-पड़ताल से इस प्रश्न के निर्णय की दिशा में

योगदान मिलना चाहिए। यह बताएं कि आपकी सिफारिश के अनुसार मताधिकार

के सामान्य विस्तार के जरिए किस हद तक दलित वर्ग सामान्य निर्वाचन-क्षेत्रों

में मताधिकार प्राप्त कर सकेंगे। दूसरी ओर, यदि यह निश्चय किया जाए कि

दलित वर्गों के लिए अलग निर्वाचक-मंडलों का गठन या तो सामान्यतः या फिर

उन प्रांतों में किया जाए जहां आबादी में उसका स्पष्ट तथा अलग अंश है, तो

आपकी कमेटी मताधिकार के विस्तार की सामान्य समस्या की पड़ताल करें और