142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस्तेमाल कर सकता था और उनका रखरखाव स्टेट करती थी। लेकिन चूंकि वे मंदिर के भवन के निकट थीं, अतः अस्पृश्यों को उनके उन कतिपय भागों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाती थी, जो मंदिर के इर्दगिर्द थे। अंततः सत्याग्रह किया गया। उसके फलस्वरूप मंदिर के आंगन को चौड़ा किया गया और सड़क को पुनः इस प्रकार बनाया गया कि यदि उसका इस्तेमाल अस्पृश्य भी करें, तो वे मंदिर को अपवित्र करने वाले फासले से परे रहें।
II
पानी प्राप्त करने के सार्वजनिक स्थानों से पानी लेने का अधिकार पाने के लिए जो प्रयास किए गए, उनमें चावदार तालाब के मामले का उल्लेख पर्याप्त होगा।
यह चावदार तालाब बंबई प्रेसिडेंसी के कोलाबा जिले के महाड नगर में स्थित है। यह एक अति विशाल तलाब है। इसमें मुख्यतः वर्षा का और कुछ प्राकृतिक स्रोतों का पानी आता है। तालाब के चारों ओर तटबंध है। तालाब के चारों ओर व्यक्तिगत स्वामित्व वाली जमीन की छोटी-छोटी पट्टियां हैं। जमीन की इस पट्टी के परे तालाब के चारों ओर नगरपालिका की सड़क है। सड़के के परे स्पृश्यों के अपने निज़ी मकान हैं। तालाब हिंदू क्षेत्रों के बीचों-बीच स्थित है और हिंदू भवनों से घिरा है।
यह एक प्राचीन तालाब है। कोई नहीं जानता कि उसे किसने और कब बनवाया। लेकिन 1869 में जब सरकार ने महाड नगर के लिए नगरपालिका की स्थापना की, तो सरकार ने उसे नगरपालिका को सौंप दिया। तब से उसे नगरपालिका का तालाब, यानी सार्वजनिक तालाब माना जाता है।
महाड एक व्यावसायिक केंद्र है। वह तालुका का प्रधान कार्यालय भी है। अस्पृश्यों को वहां खरीदारी करने तथा ग्राम सेवके के रूप में अपना कर्तव्य निभाने के लिए आना पड़ता था। वे तालुका के अधिकारी को या तो ग्राम अधिकारी द्वारा भेजी गई चिट्ठी-पत्री देते थे या फिर ग्राम अधिकारी द्वारा एकत्र किया गया लगान सरकारी
खजाने में जमा करते थे। चावदार तालाब ही एकमात्र ऐसा तालाब था, जहां से बाहर से आने वाला कोई व्यक्ति पानी ले सकता था। लेकिन अस्पृश्यों को इस तालाब से पानी लेने नहीं दिया जाता था। अस्पृश्यों को पानी केवल महाड नगर के अस्पृश्यों के क्षेत्रों में स्थित कुएं से ही मिल सकता था। यह कुआं नगर के मध्य से कुछ दूरी पर था। नगरपालिका की उपेक्षा के कारण वह गंदगी से अटा पड़ा था।
अतः पानी के मामले में अस्पृश्यों का काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता था। मामला सुधरने तक यह सब चलता रहा। 1923 में बंबई की विधान परिषद् ने आशय का संकल्प पारित किया कि अस्पृश्य वर्गों को छूट दी जाए कि वे उन