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असहाय स्थिति

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ने सोचा कि इस बारे में मजिस्ट्रेट के यहां फौजदारी का मामला दायर कर दिया

जाए। उन्होंने यह मुकदमा 17 अक्तूबर को दायर कर दिया। यह मुकदमा सवर्ण

हिंदुओं के खिलाफ दायर किया गया है।

इस मामले में सबसे अजीब पक्ष श्री गांधी और उनके सहयोगी वल्लभभाई

पटेल की भूमिका का है। श्री गांधी ने यह पूरी घटना जानते हुए कि कवीथा

गांव के सवर्ण हिंदुओं ने अस्पृश्यों पर क्या-क्या अत्याचार और जुल्म किए थे,

अस्पृश्यों को केवल यही सलाह देना ही काफी समझा कि अस्पृश्य गांव छोड़

दें। उन्होंने तो इतना भी सुझाव नहीं दिया कि उपद्रवियों को अदालत के कटघरे

में खड़ा किया जाए। उनके सहयोगी वल्लभभाई पटेल की भूमिका तो और भी

विचित्र रही। वह सवर्ण हिंदुओं को यह समझाने लग गए कि वे अस्पृश्यों पर

जुल्म न करें। लेकिन सवर्णों ने उनकी एक न सुनी। फिर भी इन्हीं महाशय ने

अस्पृश्यों की इस बात का विरोध किया कि हिंदुओं पर मुकदमा दायर किया

जाए और अदालत से उन्हें सजा दिलाई जाए। उनके विरोध की परवाह न करते

हुए अस्पृश्यों ने शिकायत दर्ज कराई। लेकिन अंततः श्री पटेल ने अस्पृश्यों को

विवश किया कि वे सवर्ण हिंदुओं के खिलाफ अपनी शिकायत वापस ले लें।

उन्होंने एक प्रकार के वायदे का नाटक रचा कि हिंदू छेड़छाड़ नहीं करेंगे। यह

एक ऐसा वायदा था, जिसे अस्पृश्य कभी लागू नहीं करवा सकते। नतीजा यह

हुआ कि अस्पृश्यों ने अत्याचार सहा और उन पर अत्याचार करने वाले लोग श्री

गांधी के मित्र, श्री वल्लभभाई पटेल की मद से बचकर साफ निकल गए।

सवर्ण हिंदू अस्पृश्यों पर यह क्रमबद्ध अत्याचार छोटे-मोटे मामलों में भी करते रहते हैं, जैसे उन्हें अच्छे कपड़े और जेवर नहीं पहनने दिए जाते।

III

अंत में कौन जीतेगा, यह एक दिलचस्प अटकल है। जो लोग अस्पृश्यों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं, वे स्थिति को सावधानी से निरख-परख रहे हैं। अंततः नतीजा जो भी हो, पर एक बात स्पष्ट है कि इस संघर्ष में अस्पृश्यों का पलड़ा हल्का है।

हिंदुओं के साथ इस संघर्ष में सदैव अस्पृश्यों को ही दबाया जाता है। जब भी हिंदू अराजकता पर उतर आते हैं तो अस्पृश्य सदस ही असहाय हो जाते हैं। सवाल यह है कि सदैव उन्हें ही क्यों दबाया और मारा-पीटा जाता है? यह महत्वपूर्ण सवाल है, और इसका जवाब दिया जाना चाहिए?

सवर्ण हिंदुओं के साथ इस संघर्ष में अस्पृश्य क्यों असहाय स्थिति में रहते हैं, इसके कारण नितांत स्पष्ट हैं। एक तो यह है कि जहां तक संख्या का संबंध है,