8. असहाय स्थिति - Page 183

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है। कानून यह नहीं देखता कि इससे उस अस्पृश्य को कितनी हानि हो रही है। पुलिस अपनी शक्ति और अपने अधिकार का दुरुपयोग कर सकती है। पुलिस अधिकारी ऐसी बात को दर्ज कर सकता है जो कही ही नहीं गई या ऐसा बात को दर्ज कर, जो की गई बात से नितांत भिन्न हो, जान-बूझकर अपने रिकार्ड तोड-मरोड़ सकता है। वह उस पक्ष को गवाहों के नाम-पते आदि बता सकता है, जिसमें उसका स्वार्थ होता है। वह किसी को गिरफतार करने से इंकार कर सकता है। वह किसी मामले को खत्म करने के लिए कुछ भी कर सकता है। वह यह सब काम पकड़े जाने के डर के बिना कर सकता है। कानून में बहुत-सी कमियां हैं और वह इन कमियों को अच्छी तरह जानता है। मजिस्ट्रेट ने से अपने विवेक का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह छूट दे रखी है। वह उसका इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह आजाद है। किसी भी मामले का निर्णय गवाहों पर निर्भर करता है, जो गवाही दे सकते हैं। लेकिन मुकदमे का निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि क्या गवाहियां विश्वसनीय हैं या नहीं। यह मजिस्ट्रेट पर निर्भर करता है कि वह किस पर विश्वास और किस पर अविश्वास करता है। वह किसी भी पक्ष पर विश्वास करने के लिए पूर्ण स्वतंत्र है और वह जो कुछ करता है, वह उसका अपना विवेक होता है और कोई भी उसके इस विवेक का इस्तेमाल करने में दखल नहीं कर सकता। ऐसे बहुत से मामले हैं, जिनमें मजिस्ट्रेट ने अपने विवेक का इस्तेमाल अस्पृश्यों के हितों के खिलाफ किया है। अस्पृश्यों की गवाहियां चाहे कितनी भी सच्ची क्यों न हों, मजिस्ट्रेट सभी लोगों में एक ही बात कह देता है, ‘मुझे गवाहों पर विश्वास नहीं है’, और किसी ने भी उसके इस विवेकाधिकार को चुनौती नहीं दी है। कौन-सी सजा सुनाई जाए, यह भी मजिस्ट्रेट का विवेकाधिकार है। कुछ ऐसे भी निर्णय होते हैं, जिनके खिलाफ अपील की जा सकती है। अगर उचित न्याय नहीं हुआ है तो उचित न्याय पाने का रास्ता यही अपील होती है। मजिस्ट्रेट द्वारा यह कह दिया जाता है कि इस मामले में दिए गए निर्णय के खिलाफ अपील नहीं हो सकती।

ये हैं वे ताकतें जो संघर्षशील अस्पृश्यों के विरुद्ध काम कर रही है। उन पर विजय प्राप्त करने का कोई मार्ग है ही नहीं, क्योंकि एक ऐसे समूचे समाज को दंडित करने का कोई तरीका नहीं है, जो संगठित रूप से कानून को धता बताने पर तुला हुआ हो।

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निश्चय ही इन कठिनाइयों पर पूर्णतः विजय तो प्राप्त नहीं की जा सकती, पर उन्हें कम करने का एक मार्ग अस्पृश्यों के लिए खुला। वह है, राजनीति और राजनीतिक सत्ता के प्रभावी प्रयोग का मार्ग। लेकिन इस मामले में अस्पृश्यों का प्रयास विफल कर दिया गया है।