178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कोई भी आदि-द्रविड़ अपने बाल नहीं कटवाएगा,
आदि-द्रविड़ अपने घरों में केवल मिट्टी के बर्तन ही इस्तेमाल करेंगे,
उनकी स्त्रियां अपने शरीर के ऊपरी भाग को वस्त्रों या राबुकाई या
थावनी से नहीं ढकेंगी,
उनकी स्त्रियां पुष्पों या केसर के उबटन का इस्तेमाल नहीं करेंगी, और
मर्द लोग न तो धूप और वर्षा से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करेंगे
और न ही चप्पल पहनेंगे।
जून 1931 में जब विचाराधीन ‘बाह्य’ जातियों ने इन आठ प्रतिबंधों का संतोषजनक ढंग से पालन नहीं किया, तो कल्लार पुनः एकत्र हुए और उन्होंने ग्यारह प्रतिबंधों की रचना की। इन प्रतिबंधों ने तो मूल आठ प्रतिबंधों को भी मात दे दी। इन प्रतिबंधों को लागू करने के प्रयास में हिंसा और भी भड़की। ये ग्यारह प्रतिबंध थेः
- आदि-द्रविड़ और देवेंद्रकुल वेल्लार अपने घुटनों से नीचे वस्त्र धारण
नहीं करेंगे,
उपर्युक्त दलित वर्गों के पुरुष और स्त्रियां सोने के जेवर नहीं पहनेंगे,
स्त्रियां केवल मिट्टी के बर्तनों में पानी ले जाएंगी, तांबे या पीतल के
बर्तनों में नहीं। पानी वाले बर्तनों को ढोने के लिए वे केवल पुआल का इस्तेमाल
करेंगी। इस काम के लिए वे कपड़े का इस्तेमाल नहीं करेंगी,
उनके बच्चे नहीं पढ़ेंगे और न ही से साक्षर होंगे या शिक्षा प्राप्त करेंगे,
बच्चे केवल मिरासदारों के मवेशी चराएंगे,
उनके पुरुष और स्त्रियां अपनी-अपनी पन्नाइयों में मिरासदारों के गुलामों
के रूप में काम करेंगे,
वे मिरासदारों से भूमि वरम या पट्टे पर लेकर खेती नहीं करेंगे,
उन्हें गांव के मिरासदारों की अपनी जमीन बहुत ही सस्तें दामों पर बेच
देनी पड़ेगी और यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें भूमि की सिंचाई के लिए पानी
नहीं दिया जाएगा। यदि वर्षा के जल से कोई चीज उगाई भी जाएगी तो कटाई
के योग्य होने पर फसलों को लूट लिया जाएगा,