10. श्री गांधी की छत्राछाया में - Page 210

श्री गांधी की छत्रछाया में

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  1. दलित वर्गों की पृथक प्रतिनिधित्व की मांग के विरोध में गांधीजी ने कहा कि वह नहीं चाहते कि हिंदू समाज खंड-खंड हो जाए या उसके उसके छोटे-छोटे टुकड़े हो जाएं। लेकिन कांग्रेस अब अस्पृश्य समुदाय के एक वर्ग को दूसरे वर्ग से भिड़वाकर उसका विखंडन कर रही है। गांधीजी और कांग्रेस उचित व्यवहार नहीं कर रहे हैं। धोखेबाज दोस्तों से तो खुले दुश्मन हजार दर्जे बेहतर होते हैं।

  2. यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि केवल गांधीजी और कांग्रेस ही दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसके लिए वे चंद भाड़े के पिट्ठुओं और ठगों के द्वारा अभिनंदन करा रहे हैं। क्या हमारा यह कर्तव्य नहीं है कि हम हजारों की संख्या में एकत्र होकर तथ्य को उजागर करें और सत्य की उद्घोषणा करें? यह है, हमारा आरोप-पत्र गांधीजी और कांग्रेस के खिलाफ।

अतः फैसला वे लोग दें जो अंध-नायक पूजक और अंध-पक्षपाती न्यायकर्ता नहीं हैं।

महासचिव

दलित वर्ग संस्थान

III

क्या यह आरोप-पत्र सही है? श्री गांधी विश्व में न केवल इसलिए विख्यात हैं कि वह भारत के राजनेता हैं, बल्कि इसलिए भी कि वह अस्पृश्यों के पक्षधर हैं। संभवतः सच यह है कि बाहरी संसार श्री गांधी में अधिक रुचि इस कारण लेता है कि वह अस्पृश्यों के पक्षधर हैं, न कि इसलिए कि वह एक राजनेता हैं। उदाहरण के तौर पर हाल ही में ‘मानचेस्टर गार्जियन’ ने अस्पृश्यों के लिए श्री गांधी के कार्य के बारे में एक संपादकीय लिखा है।

इसे देखते हुए आरोप नितांत निराधर दीख पड़ता है। क्योंकि, क्या श्री गांधी ने कांग्रेस से यह प्रतिज्ञा नहीं करवाई है कि वह अस्पृश्यता को मिटाएंगे? श्री गांधी के हाथों में आने से पूर्व कांग्रेस ने किसी भी सामाजिक समस्या को विचारार्थ अपने सामने रखे जाने से मना कर दिया था। राजनीतिक तथा सामाजिक समस्या के बीच एक स्पष्ट विभाजन रेखा खींच दी गई थी और अति सावधानी से प्रयास किया गया था कि कांग्रेस की गतिविधियों और विचार-विमर्शों को केवल राजनीतिक मसलों तक ही सीमित रखा जाए। पुरानी कांग्रेस ने अस्पृश्यों की ओर ध्यान देने से इंकार कर दिया था। बड़ी मुश्किल से 1917ऽ में कांग्रेस ने पहली बार अपने सामने अस्पृश्यों के मसले को रखे जाने की अनुमति दी और निम्न संकल्प पारित करने का अनुग्रह कियाः

  1. मूल अंग्रेजी की पांडुलिपि में वर्ष का उल्लेख नहीं किया गया है µ संपादक।