10. श्री गांधी की छत्राछाया में - Page 213

198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रथम अवधि

I

आइए, बारदोली कार्यक्रम वाली अवधि से प्रारंभ करें। कांग्रेस का बारदोली कार्यक्रम या रचनात्मक कार्यक्रम उस नई कार्यनीति का सीधा नतीजा था, जिसे कांग्रेस ने देश की राजनीतिक मांगों को पूरा कराने के लिए अपनाया था।

सन् 1920 के अपने नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने घोषणा कीः

चूंकि भारतवासी अब स्वराज की स्थापना के लिए कृतसंकल्प हैं, और

चूंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पिछले विशेष अधिवेशन से पूर्व भारतवासियों

द्वारा अपनाए गए सभी उपाय उनके अधिकारों तथा राजनीतिक सुविधाओं को

उचित मान्यता दिलाने में विफल रहे हैं_

अतः अब यह कांग्रेस कलकत्ता के विशेष कांग्रेस अधिवेशन में पारित

अहिंसक असहयोग संबंधी संकल्प की पुष्टि करती है और घोषणा करती है कि

एक ओर वर्तमान सरकार से स्वैच्छिक संबंध के परित्याग की तथा दूसरी ओर

कर अदा न करने की व्यवस्था वाली अहिंसक असहयोग-योजना को समग्र या

आंशिक रूप में उस समय लागू किया जाए, जिसका निर्धारण या तो भारतीय

राष्ट्रीय कांग्रेस या फिर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी करे और इस बीच वह

इसके लिए देश को तैयार करे।....

सन् 1921 में अहमदाबाद के कांग्रेस अधिवेशन में घोषणा की गईः

इस कांग्रेस की यह राय है कि सशस्त्र विद्रोह कर एकमात्र सभ्यतापूर्ण और

प्रभावशाली विकल्प है सविनय अवज्ञा... अतः वह सभी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं

तथा अन्य सभी को सलाह देती है कि ... वे व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा तथा

सामूहिक सविनय अवज्ञा का आयोजन करें।

असहयोग तथा सविनय अवज्ञा की इस नीति को कार्यरूप देने के लिए तथा उनमें भाग लेने के वास्ते लोगों को तैयार करने के लिए फरवरी 1922 में बारदोली में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक हुई और उसमें निम्न कार्यक्रम तैयार किया गयाः

  1. कांग्रेस के कम-से-कम एक करोड़ सदस्य बनाना।

  2. चरखे का प्रचार-प्रसार करना और हाथ से कते तथा हाथ से बुने खद्दर

के उत्पादन का आयोजन करना।