श्री गांधी की छत्रछाया में
- राष्ट्रीय स्कूलों की व्यवस्था करना।
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- बेहतर जीवन यापन के लिए दलित वर्गों को संगठित करना, उनकी सामा
जिक, मानसिक तथा नैतिक दशा में सुधार करना, ताकि वे राष्ट्रीय स्कूलों
में अपने बच्चे भेजने की प्रेरणा प्राप्त कर सकें और उनके लिए भी अन्य
नागरिकों को प्राप्त सामान्य सुविधाओं की व्यवस्था करना।
टिप्पणः अतः जिन स्थानों में अस्पृश्यों के प्रति पूर्वाग्रह अब भी प्रबल हैं, वहां निश्चय
ही कांग्रेस के फंड से अलग स्कूलों तथा अलग कुओं की व्यवस्था की जाए। इस
बात का भरसक प्रयास किया जाए कि ऐसे बच्चे राष्ट्रीय स्कूलों में आएं और
लोगों से अनुरोध किया जाए कि वे अस्पृश्यों को सांझे कुओं का इस्तेमाल करने
दें।
- घर-घर जाकर मद्यमान के व्यसनी लोगों के बीच मद्य-त्याग अभियान
का आयोजन करना और धरना देने के स्थान पर व्यसनी के घर में
अपील का सहारा अधिक लेना।
- सभी विवादों के निजी निपटारे के लिए ग्राम तथा नगर पंचायतों का गठन करना,
उनकी आज्ञा का पालन करना, यह सुनिश्चित करने के लिए केवल जनमत
की शक्ति और पंचायत के निर्णयों की सच्चाई का आश्रय लेना।
- असहयोग आंदोलन का लक्ष्य हे, सभी वर्गों तथा जातियों के बीच एकता
पर जोर देना और आपसी भाईचारे की स्थापना करना। अतः उनके लिए
एक समाज सेवा विभाग का गठन किया जाए, जो बीमारी अथवा दुर्घटना
की दशा में बिना किसी भेदभाव के सभी की मदद करे।
- तिलक मेमोरियल स्वराज फंड की उगाही को जारी रखना और हर
कांग्रेसी तथा कांग्रेस के शुभचिंतक से अनुरोध करना कि वह 1921 के
लिए अपनी वार्षिक आय का कम-से-कम एक सौवां भाग दे। हर प्रांत
तिलक मेमोरियल स्वराज फंड से होने वाली अपनी आय का 25 प्रतिशत
भाग हर महीने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पास भेजे।
यदि आवश्यक होगा तो संशोधन के लिए उक्त संकल्प को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आगामी अधिवेशन में प्रस्तुत किया जाए।
इस कार्यक्रम को 20 फरवरी, 1922 को दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में प्रस्तुत किया गया। उसी में उसकी पुष्टि भी हुई। यह कार्यक्रम