206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
एक और मामला है, जो समझ में नहीं आता। जब मेरे प्रथम पत्र की प्राप्ति की सूचना मिली तो मैंने हरिद्वार से 3 जून, 1922 को यह पत्र लिखाः
मैं परसों हरिद्वार से चलूंगा और 6 जून को प्रातः लखनऊ पहुंच जाऊंगा। अब तक आप जान चुके होंग कि तथाकथित दलित वर्गों के प्रति मेरे मन में अत्यधिक सहानुभूति है। पंजाब में भी मैंने देखा है कि रचनात्मक कार्य के इस मद की ओर कोई उल्लेखनीय ध्यान नहीं दिया गया है। निश्चय ही संयुक्त प्रांत में यह एक दुष्कर कार्य होगा। लेकिन एक और अति गंभीर कठिनाई है।
बारदोली कार्यक्रम की मद संख्या (4) के टिप्पण में कहा गया है कि जहां पूर्वाग्रह अब भी प्रबल हैं, वहां कांग्रेस फंड में से अलग कुओं तथा अलग स्कूलों की व्यवस्था करनी ही होगी। इससे उन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को बच निकलने का रास्ता मिल जाता है, जो या तो दलित वर्गों के प्रति पूर्वाग्रह रखते हैं य फिर कमजोर हैं। अतः इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया जा सकता है कि लोगों को इस बात के लिए राजी किया जाए कि वे साझे कुओं से अस्पृश्यों को पानी लेने देंगे। मुझे पता चला है कि बिजनौर जिले में कोई रोकटोक नहीं थी और अस्पृश्य बिना किसी संकोच के साझे कुंओं से पानी लेते थे। लेकिन कुछ स्थानों में बारदोली संकल्प के टिप्पण के साए में नया पूर्वाग्रह पैदा किया जा रहा है। हाल ही में मैंने अंबाला छावनी, लुधियाना, बटाला, लाहौर, अमृतसर और जंडियाला का दौरा किया। वहां मैंने देखा कि अस्पृश्यों की असुविधाओं को दूर करने के मसले की अनदेखी की जा रही है। दिल्ली में और उसके आसपास कांग्रेस नहीं, अपितु दलितोद्धार सभा उल्लेखनीय कार्य कर रही है। उस सभा का मैं अध्यक्ष हूं। मेरे विचार में यदि बारदोली रचनात्मक कार्यक्रम की मद संख्या (4) में समुचित संशोधन नहीं किया जाएगा तो वह कार्य पिछड़ जाएगा, जिसे मैं कांग्रेस कार्यक्रम का सर्वाधिक महत्वपूर्ण मोर्चा समझता हूं।
कृपया निम्न प्रस्ताव अध्यक्ष के सामने प्रस्तुत करें और यदि वह उसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अलगी बैठक में रखे जाने की अनुमति दें, तो मैं उसे वहां प्रस्तुत करूंगा µ ‘बारदोली संकल्प की मद संख्या (4) के टिप्पण के स्थान पर निम्न टिप्पण रखा जाएः दलित वर्गों की निम्न मांगों को तुरंत पूरा किया जाए, अर्थात् (क) उन्हें अन्य वर्गों के नागरिकों के साथ एक ही दरी पर बैठने की अनुमति दी जाए, और (ख) उन्हें साझे कुओं से पानी लेने का अधिकार दिया जाए, और (ग) उनके बच्चों को राष्ट्रीय स्कूलों तथा कालिजों में भर्ती किया जाए तथा उन्हें अनुमति दी जाए कि वे तथाकथित उच्च जाति के छात्रों के साथ बिना किसी रोकटोक के मिल-जुल सकें। मैं अखिला भरतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्यों के मस्तिष्क में यह बात बैठा देना