10. श्री गांधी की छत्राछाया में - Page 223

208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में मौजूद था, जिसमें 10 जून, 1922 को संकल्प पारित करके श्री देशपांडे को उप-समिति का संयोजक नियुक्त किया गया। तब इस बात का कोई उल्लेख नहीं किया गया कि ऐसा कोई समझौता हो चुका है कि अमुक सदस्य उप-समिति के संयोजक के रूप में कार्य करेगा और समूचे संकल्प को केवल धन की अदायगी के बारे में आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए पारित किया गया। वह अनुभव किया गया इससे पूर्व कि किसी व्यय की स्वीकृति दी जा सके, उप-समिति का औपचारिक संकल्प आवश्यक था। तदनुसार श्री देशपांडे को संयोजक नियुक्त किया गया और इन प्रारंभिक कार्यवाहियों के व्यय के लिए पांच सौ रुपये की राशि की स्वीकृति दी गई। असावधानी के कारण संकल्प का जिस रूप में प्रारूप तैयार किया गया, उसमें पांच सौ रुपये की स्वीकृति का उल्लेख रह गया। इस प्रकार आप देखेंगे कि इसका कारण यह नहीं था कि कार्यकारिणी अस्पृश्यता-निवारण के लिए दस हजार रुपये की स्वीकृति नहीं देना चाहती थी, बल्कि जिस रूप में संकल्प का प्रारूप तैयार कियागया उसका सही कारण वह था, जो मैं ऊपर बता चुका हूं। कार्यकारिणी की मंशा और इच्छा भी यही थी कि वह आपकी उप-समिति से अपेक्षित कार्य के महत्व को समझे। वह किसी भी प्रकार आपकी उपयोगी सलाह की उपेक्षा नहीं करना चाहती थी। जब कार्यकारिणी की पिछली बैठक में आपके पत्र को प्रस्तुत किया गया तो पांच सौ रुपये के अनुदान की चूक को ठीक कर दिया गया और मुझे अनुदेश दिया गया कि आपसे इस मामले में संपर्क करूं। यह बड़े ही खेद की बात होगी यदि उप-समिति अस्पृश्यता के समूचे मसले के बारे में आपके अनुभव और विशेष ज्ञान से वंचित हो जाए। अतः मैं लोकहित में आपसे अनुरोध करता हूं कि आप अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें और मुझे इलाहाबाद के मेरे कार्यालय पर तार द्वारा सूचित करें कि आपने उप-समिति से अपना त्यागपत्र वापस ले लिया है। मैं यह कहने की जरूरत नहीं समझता हूं कि भविष्य में आपकी उप-समिति जो भी संकल्प करेगी, उनकी ओर कार्यकारिणी पूर्णतः समुचित ध्यान देगी।

जहां तक अलग कुओं तथा स्कूलों से संबद्ध कार्यकारिणी के संकल्प में परिवर्तन का संबंध है, सर्वोत्तम मार्ग तो यही होगा कि आपकी उप-समिति परिवर्तन की सिफारिश करे और कार्यकारिणी उसे स्वीकार करे।

मेरा विचार है कि जहां तक इलाहाबाद के ‘दि इंडिपेंडेंट’ तथा दिल्ली के ‘दि कांग्रेस’ को अनुदान दिए जाने का संबंध है, आप किसी गलतफहमी के शिकार हुए हैं। ‘दि इंडिपेंडेंट’ के संबंध में केवल संयुक्त प्रांत की कमेटी की अर्जी को मंजूरी दी गई है। उसमें कहा गया है कि कमेटी को जो धनराशि दे दी गई है, उसमें से