श्री गांधी की छत्रछाया में
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शुरू में तो सवर्ण हिंदुओं के खिलाफ अस्पृश्यों के इस सत्याग्रह की निंदा श्री गांधी ने की। उन्होंने उसका समर्थन नहीं किया। इस विवाद में अस्पृश्यों का पक्ष पूर्णतः तर्क-सम्मत था। उनका कहना था कि यदि सविनय अवज्ञा ऐसा हथियार था जिसका इस्तेमाल श्री गांधी के अनुसार हिंदू वैध रूप से स्वाधीनता की प्राप्ति के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध कर सकते हैं, तो इसका क्या औचित्य है कि वे दासता से अपनी मुक्ति के लिए सवर्ण हिंदुओं के खिलाफ उसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। कितना सही यह तर्क था, पर श्री गांधी पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने उनके इस तर्क का उत्तर अपने तर्क से देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अस्पृश्यता तो हिंदुओं का पाप है। अतः प्रायश्चित भी हिंदुओं को ही करना चाहिए। उन्हें ही अस्पृश्यता मिटाने के लिए सत्याग्रह करना चाहिए। सत्याग्रह अस्पृश्यों का कार्य नहीं है, क्योंकि पानी वे नहीं हैं। वे पापी कैसे हुए, उनके प्रति तो पाप किया गया है। निश्चय ही यह अरस्तू जैसा तर्क नहीं है। यह तो महात्मा जैसा तर्क है, जिसे वाक्छल भी कह सकते हैं। लेकिन यह तो स्पष्ट है कि महात्मा जैसा यह तर्क कोरी बकवास है। अस्पृश्यों का उत्तर था कि यदि श्री गांधी का यही दृष्टिकोण है कि सत्याग्रह एक ऐसा प्रायश्चित है, जिसे पापी को ही करना चाहिए, तो वह हिंदुओं से अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह करने के लिए क्यों कहते हैं। अंगेजी साम्राज्यवाद तो अंग्रेजों का पाप है। अतः उनके ही तर्क के अनुसार सत्याग्रह तो अंग्रेजों को ही करना चाहिए, न कि सवर्ण हिंदुओं को। अस्पृश्यों ने उनके तर्क को ध्वस्त कर दिया था। यह स्पष्ट हो गया था कि सवर्ण हिंदुओं के विरुद्ध अस्पृश्यों के इस सत्याग्रह के प्रति श्री गांधी के इस दृष्टिकोण में भ्रांति अथवा अनिष्ठा है। लेकिन श्री गांधी ने विरोध का जो हठी दृष्टिकोण अपना लिया था, अस्पृश्य उन्हें उसे डिगा नहीं सके।
श्री गांधी के दृष्टिकोण में एक और विसंगति है। दो स्थानों पर एक से सत्याग्रह हुए, पर उनके बारे में श्री गांधी का दृष्टिकोण अलग-अलग था। सवर्ण हिंदुओं के खिलाफ अस्पृश्यों ने महाड और नासिक में सत्याग्रह किया। वैसा ही सत्याग्रह उन्होंने वाइकोम में किया। श्री गांधी ने वाइकोम सत्याग्रह का समर्थन किया। उन्होंने इसके लिए आशीर्वाद और प्रोत्साहन भी दिया। तो फिर श्री गांधी ने महाड और नासिक के सत्याग्रह का विरोध क्यों किया? क्या इन दोनों में कोई असमानता थी? हां, असमानता थी। अस्पृश्यों ने वाइकोम सत्याग्रह कांगे्रस के झंडे तले किया। अन्य दोनों सत्याग्रह अस्पृश्यों ने कांग्रेस के बिना स्वतंत्र रूप से किए। क्या श्री गांधी के विरोध का कोई वास्ता इस असमानता से था? श्री गांधी ने तो इसका कोई उत्तर नहीं दिया है, अंतः इसके अनुमान का भार में पाठकों पर ही छोड़ना चाहूंगा। संभवतः श्री गांधी नहीं चाहते थे कि वे उन निर्बल व्यक्तियों (मेमनों) की रक्षा करें, जो उन्हें अपना रक्षक स्वीकार नहीं करते। जब श्री गांधी ने अस्पृश्यों के इस सत्याग्रह को अपना आशीर्वाद प्रदान नहीं किया, तो यह अनिवार्य निष्कर्ष था कि रूढि़वादी हिंदुओं के खिलाफ अस्पृश्यों