10. श्री गांधी की छत्राछाया में - Page 232

श्री गांधी की छत्रछाया में

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घोषणा की गई थी कि विधान-मंडल में प्रतिनिधित्व के बारे में सभी अल्पसंख्यकों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाएगा। ख्1,

अतः दलित वर्गों के प्रतिनिधियों की यह आशा उचित ही थी कि उनकी मांग पूरी कर दी जाएगी और किसी भी ओर से उस पर आपत्ति नहीं की जाएगी।

प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कार्य सुचारु रूप से चला। किसी प्रकार की कोई अड़चन नहीं पैदा हुई। भले ही अल्पसंख्यकों के बारे में कोई समझौता नहीं हुआ, पर गोलमेज सम्मेलन में उपस्थित सभी वर्गों के प्रतिनिधियों ने दलित वर्गों के विशेष प्रतिनिधित्व के अधिकार को स्वीकार किया। अल्पसंख्यक उप-समिति ने महा सम्मेलन के समक्ष जो रिपोर्ट प्रस्तुत की, उसमें उप-समिति के निष्कर्षों को शामिल किया गया। प्रस्तुत है इस रिपोर्ट के उद्धरणः

उप-समिति सं. 2 (प्रांतीय संविधान) की इस सिफारिश से आम सहमति प्रकट

की गई कि प्रांतीय कार्यपालिकाओं में प्रमुख अल्पसंख्यक समुदाओं का प्रतिनिधित्व

सर्वाधिक व्यावहारिक महत्व का मसला है और यह भी तय हुआ कि उसी आधार

पर संघात्मक कार्यपालिका में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। अल्पसंख्या

वाले समुदायों की ओर से यह मांग प्रस्तुत की गई कि प्रांतीय और संघात्मक

विधान-मंडलों में व्यक्तिगत अथवा सामूहिक रूप से उनका प्रतिनिधित्व होना चाहिए

और यदि ऐसी संभावना न दीख पड़े तो हर मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यकों के हितों

की सुरक्षा के लिए विशेष प्रभार वाला कोई मंत्री होना चाहिए। (डॉ. अम्बेडकर

और सरदार उज्जवल सिंह चाहते थे कि पंक्ति 4 में ‘मुसलमानों’ शब्द के बाद

‘तथा अन्य प्रमुख अल्पसंख्यक समुदायों’ शब्द जोड़े जाएं)।

इस प्रकार की ऐसी योजना के अधीन संयुक्त रूप से उत्तरदायी कार्यपालिकाओं

के कार्यकरण की कठिनाई बताई गई।

उप-समिति की बैठक में हुई चर्चा से प्रतिनिधियों को सामर्थ्य मिली है

कि वे प्रस्तुत योजनाओं में निहित कठिनाइयों का सामना कर सकें और भले ही

कोई आम समझौता नहीं हो सकता है, पर उसकी जरूरत पहले से भी अधिक

उजागर हो गई है।

  1. संकल्प का मूलपाठ इस प्रकार हैः

सिख

इस तथ्य को देखते हुए कि भारत की भावी राज्य-व्यवस्था में अपनी जाति की स्थिति के बारे में सिखों

के मानस में गलतफहमी है, यह कांग्रेस सिखों को आश्वासन देती है कि भारत के लिए स्वराज का

किसी भी योजना में उनके हितों को वैसी ही सुरक्षा प्रदान की जाएगी जैसी कि पंजाब से इतर प्रांतों

के मुसलमानों तथा अल्पसंख्यकों को प्रदान की गई है।