10. श्री गांधी की छत्राछाया में - Page 236

श्री गांधी की छत्रछाया में

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वह गुमराह हो गए हैं। यह कहते हुए मुझे पीड़ा होती है, लेकिन यदि मैं ऐसा न कहूं, तो अपने प्राणों के समान प्रिय अस्पृश्यों के हित के प्रति मैं ईमानदार नहीं रहूंगा। समूचे संसार के साम्राज्य के प्रलोभन में भी मैं उनके अधिकारों का सौदा नहीं करूंगा। मैं यह बात पूरी जिम्मेदारी का अहसास करते हुए कह रहा हूं कि डॉ. अम्बेडकर का दावा उचित नहीं है कि वह भारत के समस्त अस्पृश्यों की वकालत कर रहे हैं। इससे हिंदू धर्म खंड-खंड हो जाएगा, जो संभवतः मेरे लिए किसी भी प्रकार संतोष का विषय नहीं हो सकता। मुझे परवाह नहीं, यदि अस्पृश्यों का धर्मान्तरण इस्लाम या ईसाई धर्म में कर लिया जाए। मैं उसे सहन कर लूंगा, लेकिन संभवतः मैं हिंदू धर्म की यह दुर्दशा सहन नहीं कर सकता कि गांवों में उसके ऐसे दो विभाजन हो जाएं। अस्पृश्यों के राजनीतिक अधिकारों की जो लोग बात करते हैं, वे भारत को नहीं जानते। वह यह नहीं जानते कि आज का भारतीय समाज किस प्रकार बना है। अतः मैं पूर्ण आग्रह के साथ कहना चाहता हूं कि भले ही इसके प्रतिरोध में कोई भी अन्य व्यक्ति मेरा साथ न दे, पर मैं अपने प्राणों की बाजी लगाकर भी उसका प्रतिरोध करूंगा।

लंदन में फ्रेंड्स हाउस की बैठक में श्री गांधी ने एक नितांत भिन्न दलील का सहारा लिया। कहा जाता है कि उन्होंने कहा ख्1, ः

मैंने आपके सामने अपने मन का विक्षोभ प्रकट किया है। हो सकता है कि आपकी दृष्टि में कांग्रेस अल्पसंख्यकों के अधिकारों को बदले में दे डालने के लिए सक्षम न हो। अस्पृश्यों को मैं उतना जानता हूं, जितना कि उन्हें जानने का दावा कोई कर सकता है। यह तो उनकी हत्या करने के समान होगी, यदि उनके लिए पृथक निर्वाचक-मंडलों की व्यवस्था की जाए। वे फिलहाल उच्च वर्गों के हाथों में हैं। वे उनका पूर्णतः दमन कर सकते हैं और अपनी दया पर आश्रित अस्पृश्यों से बदला ले सकते हैं। मैं ऐसी स्थिति को उत्पन्न होने से रोकना चाहता हूं, और इसलिए मैं उनके लिए पृथक निर्वाचक-मंडलों की मांग का विरोध करूंगा। मैं जानता हूं कि आपके सामने ऐसा कहकर मैं अपनी ग्लानि ही प्रकट कर रहा हूं। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में मैं उनके लिए विनाश को कैसे आमंत्रण दे सकता हूं। मैं उस अपराध का दोषी नहीं बनूंगा। ख्2, डॉ. अम्बेडकर एक योग्य व्यक्ति हैं,

  1. यंग इंडिया

  2. इससे यह प्रभाव पड़ सकता है कि श्री गांधी केवल पृथक निर्वाचक-मंडलों के विरोधी थे और अस्पृश्यों को संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र देने के लिए तैयार थे, और गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने यह स्पष्ष्ट कर दिया था कि अस्पृश्यों को आरक्षित सीटें दी जाएं। प्रस्तुत है, अल्पसंख्यकों संबंधी उप-समिति में उनके भाषण से निम्न उद्धरणः

मैं पुनः वह कहना चाहूंगा, जो मैं कह चुका हूं कि जहां कांग्रेस किसी भी ऐसे समाधान को स्वीकार करेगी जो हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों को स्वीकार हो, वहां कांग्रेस किन्हीं अन्य अल्पसख्यकों के लिए विशेष आरक्षण अथवा विशेष निर्वाचक-मंडल का समर्थन नहीं करेगी।