224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और उन्होंने उनसे पूछा कि उनकी इस घोषणा का क्या हुआ कि स्वराज के लिए अस्पृश्यता-निवारण एक पूर्व शर्त है। जो सूचना मुझे मिली, उसके अनुसार श्री गांधी का यह उत्तर थाः
अस्पृश्य एक समग्र के अंग हैं। मैं तो समग्र के लिए कार्य कर रहा हूं। अतः
मेरा विचार है कि मैं अस्पृश्यों के लिए कार्य कर रहा हूं, जो समय के अंग हैं।
डांडी में जो लोग श्री गांधी से मिलने गए थे, उनके द्वारा दी गई सूचना के अलावा इसे सिद्ध करने के लिए मेरे पास और कोई तथ्य नहीं है। लेकिन मुण्े इसमें संदेह नहीं कि निश्चय ही श्री गांधी ने इस आशय की कोई बात कही होगी, क्योंकि उनके कथित उत्तर का मेल उस उत्तर से खाता है, जो उपरोक्त ‘यंग इंडिया’ में उसी संवाददाता को उन्होंने दिया था। तब श्री गांधी ने कहा थाः
... यद्यपि ‘पंचम’ समस्या’ मुझे अपने प्राणों की भांति प्रिय है, फिर भी मैं
एकमात्र असहयोग की ओर ध्यान देकर संतुष्ट हूं। मेरा विश्वास है कि बड़े में
छोटे का समावेश हो जाता है।
क्या ये सच्चे व्यक्ति के उत्तर हैं? क्या सच्चे व्यक्ति का यह विचार हो सकता है कि अस्पृश्य एक समग्र के अंग हैं?
उनका यह तर्क एकदम खोखला है कि अस्पृश्यों को विशेष प्रतिनिधित्व देने से स्पृश्यों और अस्पृश्यों के बीच का वर्तमान विभाजन सदा-सर्वदा के लिए स्थाई हो जाएगा। अस्पृश्यता-निवारण का उपाय है कि अंतर्जातीय विवाह और सहभोज हों। अस्पृश्यों की असुविधाएं दूर करने का उपाय है कि उन्हें साझे कुओं और साझे स्कूलों का उपयोग करने दिया जाए। यह समझ में नहीं आता कि विशेष प्रतिनिधित्व किस प्रकार अंतर्जातीय विवाह, सहभोज, साझे कुंए और स्कूल के उपयोग में बाधक बन सकता है। दूसरी ओर इन बातों का चलन ही वह अकेला रास्ता है, जो विशेष प्रतिनिधित्व को अनावश्यक सिद्ध करेगा। क्या कांग्रेस और श्री गांधी ने इस दिशा में कुछ किया है? बारदोली संकल्प में स्पष्टीकरण का जो टिप्पण जोड़ा गया है, उससे पता चल जाता है कि श्री गांधी और कांग्रेस इस दिशा में कहां तक जाने को तैयार थे। टिप्पण में कहा गया हैः
अतः जिन स्थानों में अस्पृश्यों के प्रति पूर्वाग्रह अब भी प्रबल है, वहां निश्चय
ही कांग्रेस के फंड से अलग स्कूलों तथा अलग कुओं की व्यवस्था की जाए। इस
बात का भरसक प्रयास किया जाए कि ऐसे बच्चे राष्ट्रीय स्कूलों में आएं और लोगों
से अनुरोध किया जाए कि वे अस्पृश्यों को साझे कुओं का इस्तेमाल करने दें।