10. श्री गांधी की छत्राछाया में - Page 245

230 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अस्पृश्यों के लिए विशेष प्रतिनिधित्व की मांग को उठाऊंगा। श्री गांधी सहमत नहीं हुए। लेकिन उन्होंने कहा था कि वह विरोध भी नहीं करेंगे। मुझे लगा था कि यह केवल मतभेद का मामला था। दूसरे गोलमेज सम्मेलन में मैं श्री गांधी से दो बार मिला। एक बार तो अकेले मिला और दूसरी बार अल्पतर अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों के साथ। पहली भेंट के समय श्री गांधी चरखा कात रहे थे और मैं बोल रहा था। मैं केवल एक घंटे तक बोलता रहा, पर उस बीच वह एकदम चुप रहे। अंत में उन्होंने केवल इतना भर कहा, ‘मैंने आपकी बात सुन ली है। मैं उस पर विचार करूंगा।’ दूसरी भेंट के दौरान उन्होंने पुनः मेरी और अल्पतर अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों की बात सुनी। उन्होंने मुझसे कहा कि अस्पृश्यों की ओर से जो मांग मैं कर रहा हूं, उससे वह सहमत होने के लिए तैयार नहीं हैं। उसके बाद अल्पसंख्यक उप-समिति की बैठक 28 सितंबर, 1931 को बुलाई गई। एक अक्तूबर, 1931 की उप-समिति की बैठक में श्री गांधी ने निम्न प्रस्ताव कियाः

प्रधानमंत्री महोदय, कल रात महामहिम आगा खां तथा अन्य मुस्लिम मित्रों

से परामर्श करके हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि जिस प्रयोजन के लिए हम यहां

एकत्र हुए हैं, उसके हित में बेहतर होगा यदि एक सप्ताह के स्थगन का अनुरोध

किया जाए। अपने अन्य साथियों से परामर्श करने का मुझे अवसर नहीं मिला

है, लेकिन इस बारे में मुझे कोई संदेह नहीं है कि जो प्रस्ताव मैं कर रहा हूं,

उससे वे भी सहमत होंगे।

प्रस्ताव का अनुमोदन श्री आगा खां ने किया। मैं तुरंत खड़ा हो गया। मैंने प्रस्ताव पर आपत्ति की और अपनी आपत्ति के समर्थन में निम्न वक्तव्य दिया। ख्1,

डॉ. अम्बेडकरः समिति के विचाराधीन समस्या के किसी समाधान तक पहुंचने

के संबंध में किए जा रहे हमारे हर प्रयास के मार्ग में मैं कोई कठिनाई नहीं पैदा

करना चाहता। और यदि श्री गांधी द्वारा सुझाए गए उपायों से कोई समाधान निकल

सकता है तो मैं व्यक्तिगत रूप से उस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं करूंगा।

लेकिन दलित वर्गों के प्रतिनिधि होने के नाते मेरे सामने एक कठिनाई उत्पन्न हो

गई है। मैं नहीं जानता कि महात्मा गांधी स्थगन की अवधि में इस प्रश्न पर विचार

करने के लिए किस तरह की समिति नियुक्त करने का प्रस्ताव करना चाहते हैं। लेकिन

मेरा अनुमान है कि दलित वर्गों को इस समिति में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

  1. पृ. 245 तक कि निम्न उद्धरण जिनके अंतिम शब्द हैं µ ‘अनौपचारिक बैठकों के संबंध में मेरे

प्रस्ताव से आप पूरे मन से सहयोग करेंगे’, डॉ. अम्बेडकर की कृति, ‘व्हाट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन

टू दि अनटचेबिल्स’, पृ. 60-62 से लिए गए हैं। ये अंग्रेजी की मूल पांडुलिपि में टंकित नहीं हैं µ

संपादक।