श्री गांधी की छत्रछाया में
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श्री गांधीःनिस्संदेह।
डॉ. अम्बेडकरः धन्यवाद। लेकिन मैं नहीं जानता कि जिस स्थिति में मैं आज हूं, उसमें मेरे लिए प्रस्तावित समिति में कार्य करने की कोई सार्थकता होगी। और उसका कारण यह है कि महात्मा गांधी ने हमें पहले ही दिना बता दिया था कि उन्होंने संघात्मक संरचना समिति में कह दिया था कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के नाते वह मुसलमानों और सिखों के अलावा किसी भी अन्य संप्रदाय को राजनीतिक मान्यता देने के लिए तैयार नहीं है। वह आंग्ल-भारतीयों, दलित वर्गों और भारत के ईसाइयों को भी मान्यता देने के लिए तैयार नहीं हैं। मेरा विचार है कि मैं इस समिति में यह कहकर शिष्टाचार का कोई हनन नहीं कर रहा हूं कि जब मुझे एक सप्ताह पूर्व महात्मा गांधी से भेंट करने का सुअवसर मिला था और मैंने उनके साथ दलित वर्गों के मसले पर चर्चा की थी और कल जब हमें अन्य अल्पसंख्यकों के सदस्यों के रूप में उनसे बातचीत करने का अवसर मिला था, तो अपने कार्यालय में उन्होंने नितांत स्पष्ट शब्दों में कह दिया था कि संघात्मक संरचना समिति में उन्होंने जो दृष्टिकोण अपनाया था, वह एक सुदृढ़ तथा सुविचारित दृष्टिकोण था। मैं यह कहना चाहूंगा कि जब तक प्रांरभ में ही मुझे यह पता न चल जाए कि भारत के भावी संविधान में राजनीतिक मान्यता के अधिकारी समुदाय के रूप में दलित वर्गो को मान्यता दी जाएगी, तब तक मैं नहीं जानता कि उस समिति में शामिल होने से मेरा कोई प्रयोजन सिद्ध होगा, जिसके गठन का प्रस्ताव महात्मा गांधी ने इस मसले पर विचार करने के लिए किया है। अतः जब तक मुझे यह आश्वासन नहीं दिया जाता कि यह समिति शुरू से ही यह मानकर चलेगी कि गत वर्ष अल्पसंख्यक उप-समिति ने जिन-जिन समुदायों के लिए सिफारिश की थी कि वे भारत के भावी संविधान में मान्यता के लिए उपयुक्त हैं, उन सभी को शामिल किया जाएगा, तब तक मुझे नहीं मालूम कि मैं स्थगन के प्रस्ताव का पूरे मन से समर्थन कर सकता हूं अथवा मनोनीत की जाने वाली समिति से पूरे मन से सहयोग का सकता हूं। इसके बारे में मैं स्पष्टीकरण चाहता हूं।
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डॉ. अम्बेडकरः मैं अपनी स्थिति को और स्पष्ट करना चाहूंगा। ऐसा लगता है कि मैंने जो कहा है, उसके बारे में कुछ गलतफहमी हो गई है। बात यह नहीं है कि मैं स्थगन पर आपत्ति करता हूं। बात यह नहीं है कि मसले पर विचार के लिए जो कोई समिति नियुक्त की जा सकती है, उसमें काम करने पर मैं आपत्ति करता हूं। यदि वे मुझे इस समिति में काम करने का सौभाग्य प्रदान करना चाहते हैं, तो मैं इस समिति में शामिल होने से पूर्व यह जानना चाहूंगाः यह समिति किस विषय पर विचार करेगी? क्या वह केवल मुसलमानों और हिंदुओं के मसले पर विचार करेगी? क्या वह मुसलमानों और पंजाब के सिखों के मसले