11. गांधी और उनका अनशन - Page 250

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गांधी और उनका अनशन

I . पूना समझैता,

II . हरिजन सेवक संघ,

III . मंदिर और अस्पृश्य, और

IV . गांधीवादी शैली।

I

सांप्रदायिक मसला वह कठोर चट्टान थी, जिससे टकराकर भारतीय गोलमेज सम्मेलन का जहाज चूर-चूर हो गया। सम्मेलन भंग हो गया, क्योंकि बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक संप्रदायों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। भारत के अल्पसंख्यकों का आग्रह था कि स्वराज के अधीन उनकी स्थिति को सुरक्षा पद्रान की जाए और उन्हें विधान-मंडलों में विशेष प्रतिनिधित्व दिया जाए। कांग्रेस के प्रतिनिधि के नाते श्री गांधी मुस्लिमों और सिखों के अलावा और किसी की ऐसी मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। मुसलमानों और सिखों के मामलें में भी, न तो सीटों की संख्या के बारे में और न ही निर्वाचन-क्षेत्रों के स्वरूप के बारे में कोई समझौता हो सका।

पूर्ण गतिरोध हो गया। चूंकि समझौते की कोई गुंजाइश नहीं थी, अतः आशा की किरण मध्यस्था में दिखाई दी। मेरे सिवाय इसके लिए हर कोई तैयार था और मसले में निपटारे का भार प्रधानमंत्री रैम्जे मैक्डोनाल्ड पर छोड़ दिया गया।

जब प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि सांप्रदायिक मसले के किसी हल के बारे में सहमत नहीं हो सके, तो श्री गांधी के अनुयायिं ने कहा कि उन प्रतिनिधियों से इससे बेहतर कोई आशा नहीं की जा सकती थी। यह कहा गया कि प्रतिनिधि न तो प्रतिनिधि थे और न ही किसी के प्रति उत्तरदायी थे। वे जान-बूझकर फूट डाल रहे थे। वे तो अंग्रेजों के हाथों में खेल रहे थे। वे तो अंग्रेजों की कठपुतलियां