11. गांधी और उनका अनशन - Page 255

240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

देखा गया कि इस निर्णय के अनुसार दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन-मंडलों का गठन होगा, तो मैं अपनी प्रतिज्ञा को पूरी करने के लिए वैसे कदम उठाऊं, जिन्हें मैं उस समय जरूरी समझूं। लेकिन मेरा विचार है कि ब्रिटिश सरकार के प्रति मेरा यह व्यवहार उचित नहीं होगा कि मैं पूर्व सूचना के बिना कोई कदम उठाऊं। स्वाभाविक है कि वह मेरे वक्तव्य को वह महत्व प्रदान नहीं कर सकी, जो मैं प्रदान करता हूं।

पृथक निर्वाचन-मंडल हानिकर

मैं जरूरी नहीं समझता कि दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक-मंडलों के गठन के बारे में अपनी सभी आपत्तियों को दुहराऊं। मुझे लगता है, जैसे मैं भी उन्हीं में से एक हूं। उनका मामला औरों से नितांत भिन्न आधार वाला है। मैं विधान-मंडलों में उनके प्रतिनिधित्व का विरोध नहीं करता। मैं तो इस बात का पक्षधर हूं कि उनके हर वयस्क को, चाहे पुरुष हो या स्त्री, शिक्षा अथवा संपत्ति की योग्यता के बिना ही वोटर के रूप में दर्ज किया जाए भले ही औरों के लिए मताधिकार का मापदंड उनसे कठोर हो। लेकिन मेरा विचार है कि पृथक निर्वाचन-मंडल उनके लिए और हिंदू धर्म के लिए हानिकर हैं, विशुद्ध राजनीतिक दृष्टिकोण से जो भी स्थिति हो। पृथक निर्वाचन-मंडल उन्हें क्या हानि पहुंचाएंगे, उसे समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि तथाकथित सवर्ण हिंदुओं के बीच उनकी क्या स्थिति है और किस प्रकार वे सवर्ण हिंदुओं पर आश्रित हैं। जहां तक हिंदू धर्म का संबंध है, पृथक निर्वाचन-मंडलों का अर्थ होगा, उसका विखंडन और उसका विनाश।

मेरी दृष्टि में इन वर्गों का मसला मुख्यतः नैतिक और धार्मिक है। भले ही राजनीतिक पक्ष महत्वपूर्ण है, पर नैतिक तथा धार्मिक पक्ष की तुलना में उसका महत्व फीका पड़ जाता है।

इस मामले में आपको मेरी भावनाओं को समझना ही होगा और स्मरण करना होगा कि बचपन से ही इन वर्गों की दशा के प्रति मेरी रुचि रही है और उनके हित के लिए मैंने एक से अधिक बार अपना सर्वस्व दांव पर लगाया है। ऐसा कहकर मैं अपना कोई अहंकार नहीं जता रहा हूं। क्योंकि मेरा विचार है कि हिंदुओं ने दलित वर्गों को सदियों तक सुनियोजित अधोगति की जिस स्थिति में धकेला है, उसकी क्षतिपूर्ति वे किसी भी प्रायश्चित द्वारा नहीं कर सकते।

आमरण अनशन करूंगा ही

लेकिन मैं जानता हूं कि जिस अधोगति की चक्की में वे पिसे हैं, उसके लिए पृथक निर्वाचन-मंडल न तो प्रायश्चित है और न ही इलाज। अतः मैं सविनय