11. गांधी और उनका अनशन - Page 259

244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मेरी गलती का प्रायश्चित होगी और इस प्रकार उन असंख्य नर-नारियों के मन का बोझ हल्का हो जाएगा, जिनकीमेरे विवेक के प्रति बाल-सुलभ आस्था है। और यदि मेरा निर्णय सही है, और निस्संदेह वह सही है, तो विचारित कदम मेरे जीवन की उस योजना की पूर्ति के लिए ही है, जिसमें मैं पच्चीस से भी अधिक वर्षों से जी-जान से जुटा हुआ हूं और जाहिर है कि उसमें मुझे कम सफलता नहीं मिली है।

आपका स्नेही मित्र

एम.के. गांधी

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प्रधानमंत्री ने निम्न उत्तर दियाः

10, डाउनिंग स्ट्रीट,

8 सितंबर, 1932 प्रिय श्री गांधी,

आपका पत्र मिला। उसे पढ़कर मुझे काफी हैरत हुई और मैं यह भी बता दूं कि मुझे हार्दिक खेद है कि मैं यह सोचे बिना नहीं रह सकता कि आपने यह पत्र किसी गलतफहमी में आकर लिखा है। आप वास्तव में यह नहीं समझ पाए हैं कि दलित वर्गों के बारे में महामहिम की सरकार के निर्णय का क्या अर्थ है। हमने सदा ही यह समझा है कि आप इस बात के कट्टर विरोधी हैं कि दलित वर्गों का स्थाई विच्छेद हिंदू समाज से कर दिया जाए। गोलमेज सम्मेलन की अल्पसंख्यकों संबंधी समिति की बैठक में आपने अपने दृष्टिकोण को अति स्पष्ट कर दिया था। 11 मार्च को सर सैमुएल होर को लिखे गए अपने पत्र में आपने उसे पुनः व्यक्त किया था। हमें यह भी पता है कि हिंदू जनमत का विशाल जनसमूह भी आपके दृष्टिकोण से सहमत है। अतः हमने दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व के मसले पर विचार करते समय इसे अति सावधानी से ध्यान में रखा।

सरकारी निर्णय स्पष्ट किया गया

हमें दलित वर्गों के संगठनों से अनेक अपीलें प्राप्त हुई हैं। सामान्यतः यह माना जाता है कि वे सामाजिक असुविधाओं की चक्की में पिस रहे हैं और प्रायः आपने भी इसे स्वीकार किया है। जहां इन्हें ध्यान में रखते हुए हमने दलित वर्गों के इस मान्य अधिकार की रक्षा करना अपना कर्तव्य समझा कि विधान-मंडलों