11. गांधी और उनका अनशन - Page 261

246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

या ऐसे सदस्य चुने जाने पर विचार नहीं किया, जो उनके सच्चे प्रतिनिधि हों और उनके प्रति उत्तरदायी हों, क्योंकि प्रायः सभी अवस्थाओं में ऐसे सदस्यों का चुनाव सवर्ण हिंदुओं का बहुमत ही करेगा।

हमारी योजना के अधीन दलित वर्गों को प्रारंभिक अवस्था में सामान्य हिंदू निर्वाचन-क्षेत्रों में उनके सामान्य निर्वाचन अधिकारों के अलावा सीमित संख्या वाले विशेष निर्वाचन-क्षेत्रों के माध्यम से जो विशेष लाभ दिया गया है, वह संकल्पना और प्रभाव की दृष्टि से उस प्रतिनिधित्व प्रणाली से नितांत भिन्न है जो पृथक सांप्रदायिक निर्वाचक-मंडलों द्वारा मुस्लिम जैसे अल्पसंख्यकों के बारे में अपनाई है। यथा, कोई मुसलमान न तो सामान्य निर्वाचन-क्षेत्र में वोट दे सकता है और न ही उसमें उम्मीदवार बन सकता है, परंतु मतदान के योग्य दलित वर्ग का कोई भी सदस्य सामान्य निर्वाचन-क्षेत्र में वोट दे सकता है और उसमें उम्मीदवार भी बन सकता है।

आरक्षण न्यूनतम

मुसलमानों को आबंटित क्षेत्रीय सीटों की संख्या पर यह सहज प्रतिबंध लगा हुआ है कि वे और अधिक क्षेत्रीय सीटें प्राप्त नहीं कर सकते और अधिकांश प्रांतों में उन्हें उनकी आबादी के अनुपात से अधिक वरीयता प्राप्त है। यह देखा जाएगा कि दलित वर्गों के विशेष निर्वाचन-क्षेत्रों से भरी जाने वाली विशेष सीटों की संख्या अति अल्प हो। वह इस प्रकार नियत की गई है कि वह दलित वर्गों की समूची आबादी के कुल प्रतिनिधित्व के लिए संख्या की दृष्टि से समुचित कोटा नहीं होगा, बल्कि उसका एकमात्र उद्देश्य यह है कि विधान-मंडल में दलित वर्गों के लिए न्यूनतम संख्या में प्रवक्ता तो हों और उन्हें केवल दलित वर्गों के लोग ही चुनें। उनकी विशेष सीटों का अनुपात सर्वत्र दलित वर्गों की जनसंख्या के प्रतिशत से कहीं कम है।

जैसा कि आपके दृष्टिकोण को मैं समझ पाया हूं, आप आमरण अनशन का कठोर मार्ग इसलिए नहीं अपनाना चाहते हैं कि दलित वर्गों के अन्य हिंदुओं के साथ मिले-जुले निर्वाचन-क्षेत्र हों, क्योंकि उनकी व्यवस्था तो पहले से है। न ही आप हिंदुओं की एकता को बनाए रखने के लिए यह मार्ग अपनाना चाहते हैं, क्योंकि उसकी भी व्यवस्था है। आप तो केवल चाहते हैं कि आज प्रत्यक्षतः जो दलित वर्ग भयंकर असुविधाओं से त्रस्त और ग्रस्त हैं, वे विधान-मंडलों में अपनी आवाज उठाने वाले अपनी मर्जी के गिने-चुने प्रतिनिधि भी न चुन सकें, क्योंकि उनके भविष्य पर उसका जबरदस्त प्रभाव होगा।