गांधी और उनका अनशन
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इन अति उचित तथा सतर्कतापूर्ण प्रस्तावों की दृष्टि से मैं बिल्कुल भी समझ नहीं पा रहा हूं कि आपके निर्णय का कारण क्या है। मैं तो यही सोच सकता हूं कि आपको वास्तविक तथ्यों के बारे में गलतफहमी है और उसी के कारण आपने यह निर्णय लिया है।
सरकार का निर्णय अटल है
भारतवासी जब आपस में कोई समझौता नहीं कर सके तो उनके अति सामान्य अनुरोध पर सरकार ने अति अनिच्छा से अल्पसंख्यकों के मसले पर निर्णय लेने का बीड़ा उठाया। सरकार ने अब अपना निर्णय दे दिया है और उससे आशा नहीं की जा सकती है वह अपनी पूर्वोक्त शर्तों के अलावा किसी अन्य आधार पर उसमें परिवर्तन करे। अतः मेरा विचार है कि आपको मेरा उत्तर यही होना चाहिए कि सरकार का निर्णय अटल है। केवल संप्रदायों के बीच आपसी समझौता ही उस निर्वाचन-व्यवस्था का स्थान ले सकता है जो समुचित गुण-दोष के आधार पर परस्पर विरोधी मांगों में संतुलन रखते हुए सरकार ने सत्प्रयास से प्रस्तुत की है।
आपका अनुरोध है कि यह पत्राचार तथा सर सैमुएल होर के नाम 11 मार्च का आपका पत्र प्रकाशित किया जाए। चूंकि मुझे यह उचित नहीं दीख पड़ेगा कि आप अपनी वर्तमान नजरबंदी के फलस्वरूप जनता को अपने अनशन का कारण न बता सकें, अतः मैं तत्काल आपका अनुरोध स्वीकार कर लूंगा, यदि पुनर्विचार करने पर भी आप अपने अनुरोध को दोहराएं। लेकिन मैं पुनः आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि आप सरकार के निर्णय के वास्तविक ब्यौरे पर विचार करें और गंभीरता से स्वयं अपने आप से यह प्रश्न करें कि आपने जो कदम उठाने का विचार किया है, क्या वह वास्तव में उचित है।
आपका परम शुभचिंतक
जे. रैम्जे मैक्डोनाल्ड
यह देखकर कि प्रधानमंत्री झुकेंग नहीं, उन्होंने निम्न पत्र द्वारा उन्हें सूचना दी कि वह आमरण अनशन की अपनी धमकी को पूरा करेंगे ही।
यरवदा सेंट्रल जेल,
9 सितंबर, 1932
प्रिय मित्र,
आज ही आपका तार द्वारा भेजा स्पष्ट तथा विस्तार से लिखा पत्र मिला। उसके लिए धन्यवाद। लेकिन मुझे खेद है कि आपने मेरे प्रस्तावित कदम की