11. गांधी और उनका अनशन - Page 265

250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. दलित वर्गों के लिए सामान्य निर्वाचन-क्षेत्रों में से सीटें आरक्षित की जाएंगी। प्रांतीय विधान-मंडलों में सीटों की संख्या इस प्रकार होगीः

मद्रास 30

बंबई (सिंध सहित) 15

पंजाब 08

बिहार तथा उड़ीसा 18

मध्य प्रांत 20

असम 07

बंगाल 30

संयुक्त प्रांत 20

कुल ख्1, 148

ये आंकड़े प्रधानमंत्री के निर्णय में घोषित प्रांतीय परिषदों की कुल संख्या पर आधारित हैं।

  1. इन सीटों के लिए चुनाव संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्रों द्वारा होगा, लेकिन वह निम्न प्रक्रिया के अधीन होगाः

निर्वाचन-क्षेत्रों की सामान्य मतदाता-सूची में दर्ज दलित वर्गों के सभी सदस्यों

का एक निर्वाचन-मंडल होगा। वह दलित वर्गों के चार उम्मीदवारों ही तालिका

का चुनाव करेगा। यह चुनाव एकल मत प्रणाली द्वारा ऐसी हर आरक्षित सीट के

लिए होगा। ऐसे प्रारंभिक चुनाव में जिन चार व्यक्तियों को सबसे ज्यादा वोट

मिलेंगे, वे सामान्य निर्वाचन-क्षेत्रों द्वारा चुनाव के लिए उम्मीदवार होंगे।

  1. इसी प्रकार केंद्रीय विधान-मंडल में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व संयुक्त

निर्वाचन-क्षेत्रों तथा आरक्षित सीटों के सिद्धांत के अनुसार प्रारंभिक निर्वाचन-पद्धति

द्वारा उस रीति से होगा, जिसकी व्यवस्था प्रांतीय विधान-मंडलों में उनके प्रतिनिधित्व

के लिए उपरोक्त खंड 2 में की गई है।

  1. केंद्रीय विधान-मंडल में तथा उक्त विधान-मंडल में ब्रिटिश भारत के

सामान्य निर्वाचन-क्षेत्र के लिए आबंटित सीटों का 18 प्रतिशत भाग दलित वर्गों

के लिए आरक्षित होगा।

  1. यहां पूर्व उल्लिखित, केंद्रीय तथा प्रांतीय विधान-मंडलों के चुनाव के वास्ते

उम्मीदवारों की तालिका के लिए प्रारंभिक निर्वाचन-प्रणाली प्रथम दस वर्षों के

  1. बिहार तथा उड़ीसा के बारे में सीटों का समंजन करने के लिए सीटों की संख्या 148 से बढ़ाकर 151

कर दी गई।