252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हुए। प्रस्तुत है, विभिन्न प्रांतीय विधान-मंडलों में अस्पृश्यों के लिए आरक्षित सीटों के चुनाव के परिणामों का विश्लेषण।
सारणी ख्1,
प्रति अस्पृश्यों के लिए कांग्रेस को प्राप्त
आरक्षित कुल सीटें कुल सीटें
संयुक्त प्रांत 20 16
मद्रास 30 26
बंगाल 30 6
मध्य प्रांत 20 7
बंबई 15 4
बिहार 15 11
पंजाब 8 शून्य
असम 7 4
उड़ीसा 6 4
कुल योग 151 78
इस विश्लेषण से कुछ तथ्य सामने आते हैं। प्रश्न उठता है कि पूना समझौता करने से और श्री गांधी के प्राणों की रक्षा करने से क्या अस्पृश्यों के हाथ कोई काम की चीज लगी है और क्या पूना समझौते से अस्पृश्य लोग हिंदुओं के दास नहीं बन गए हैं?
विश्लेषण से पता चलता है कि उनमें से अधिकतर कांग्रेसियों के रूप में चुने गए हैं। मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि अस्पृश्यों के लिए कांगे्रस में या उस प्रयोजन के लिए किसी विशाल राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाना उनके लिए घातक ही सिद्ध होगा।
अस्पृश्यों को आंदोलन करना होगा, यदि वे अपनी गलतियों के प्रति सचेत रहना चाहते हैं, यदि वे अपने बीच विद्रोह की भावना को जीवित रखना चाहते हैं। उन्हें आंदोलन करना होगा, क्योंकि उन्हें हिंदुओं को जताना होगा कि जो अस्पृश्यों के लिए त्रासदी है, वही सवर्ण हिंदुओं के लिए अपराध है। जहां तक कांग्रेस से मुसलमान जुड़े हैं, हो सकता है कि वह उग्र हिंदू संगठन न हो। लेकिन जहां तक कांग्रेस से सवर्ण हिंदू जुड़े हैं, वह निश्चय ही उग्र तथा उच्च कुलीनता के दंभ से परिपूर्ण हिंदू संगठन
- यह सारण्ी डॉ. अम्बेडकर की कृति, ‘व्हाट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन टू दि अनटचेबिल्स’ के पृ. 94
से ली गई है। यह सारणी मूल अंग्रेजी की पांडुलिपि में टंकित नहीं थी µ संपादक।